लॉकडाउन: पैदल ही 500 km के सफर पर निकला 50 साल का ये दिव्यांग, बैसाखी बनी सहारा
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पढ़ें एक ऐसे दिव्यांग की कहानी -

गाजियाबाद से पैदल ही सफर पर निकल पड़े दिव्यांग व्यक्ति का नाम सलीम है जिनकी उम्र 50 साल है जो एक पैर से दिव्यांग हैं. गाजियाबाद में रहकर वह अपना गुजारा कर रहे थे. लेकिन अब सलीम अपने भाइयों के साथ बैसाखी के सहारे कानपुर जाने के लिए मजबूर हैं. अभी फिलहाल वे गाजियाबाद से फिरोजाबाद की हाईवे तक पहुंच पाये हैं.

लॉकडाउन में पैदल ही 500 km के सफर पर निकल पड़ा 50 साल का दिव्यांग

तेज धूप, टपकता पसीना, लड़खड़ाते कदम, बैसाखी के दर्द को भूलते हुए पैदल ही अपने कानपुर के गांव के लिए निकल पड़े हैं. उन्हें उमीद है कि शायद वहां उनको दो वक्त की रोटी मिल सके. दिल्ली से सलीम 250 किलोमीटर का सफर बैशाखी के सहारे ही तय करके आए हैं और अभी इनको 250 किलोमीटर आगे और जाना है. दिव्यांग सलीम कि इस समय सुनने वाला कोई नहीं है. इनको सरकार से मदद की उम्मीद है

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सलीम बैसाखी पर चलते हुए कहते हैं, 'मैं गाजियाबाद से आ रहा हूं हम तो मांग कर खा लेते थे अब वहां पर चक्का जाम है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का बहुत देर से  इंतजार कर रहे थे. काफी देर तक हमने साधन का इंतजार किया लेकिन फिर हम पैदल ही निकल लिए. हम शिकोहाबाद से होकर कानपुर जाएंगे.'

आगे उन्होंने बाताया कि हम लोग सुबह 4:00 बजे से चलते हैं. सरकार से हम चाहते हैं कि हाथ पैर से लाचार हैं पर हमारे पास कोई रास्ता नहीं है. हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा है. हमने सुबह बिस्किट के पैकेट खाकर निकले थे. हमारे पास पैसे भी नहीं है मार्केट भी बंद चल रहा है.

आगे सलीम ने कहा कि हालत ऐसी हो रही है कि अभी खर्च भी नहीं है हमारे पास. वहीं अब देखना यह है कि प्रदेश और केंद्र सरकार ऐसे लोगों की कैसे मदद करेगी. अब इन मजदूरों की जिंदगी पटरी पर कब लौट कर आएगी. फिलहाल कोरोना की मार ने सब को तोड़ कर रख दिया है इनकी जिंदगी भी अब दर बदर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गई है.

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