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कहानी शीर्षक: बाँझ की उलटी, एक उम्मीद
लेखक: केशव मिश्रा



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कहानी शीर्षक: बाँझ की उलटी, एक उम्मीद

लेखक: केशव मिश्रा 



आज रेखा और सुदीप की शादी की 8वीं सालगिरह है। घर में छोटा सा प्रोग्राम है। कोई बाहरी नहीं बस कुछ करीबी दोस्त और रिश्तेदार आने वाले हैं। सुदीप कहीं बाहर जाना चाहता था लेकिन रेखा का मन नहीं था। वो पिछले 5 बरस से बाहर ही अपनी शादी की सालगिरह मानते आ रहे हैं क्योंकि सुदीप बच्चों के सवालों से परेशान हो चुका है। वो नहीं चाहता कि उसकी बहन या उसकी भाभी घर आएं और वही पुराने सवाल- बच्चे क्यों नहीं हो रहे? तुम लोग डॉक्टर के पास जा तो रहे हो? किसी बाबा जी की मदद क्यों नहीं लेते? रेखा में कमी होगी?

ऎसे सवालों से सुदीप परेशान हो चुका है लेकिन सगे संबंधी हैं। संबंधी और बुरी आदतें आसानी से नहीं छूटती। सुदीप ने रेखा को सख्त लहजे में मना किया था कि वो किसी पड़ोसी को न बुलाए। वो नहीं चाहता था कि पड़ोस की औरतों के ताने रेखा के कानों तक पड़े। वो ऎसे ही कई सालों से रेखा को दुनिया दारी की चीज़ों से अलग करता आ रहा था। रिश्तों में एक समय ऎसा भी आता है जहाँ आप अपने साथी को सब से छुपाने लग जाते हो। यही शायद सुदीप भी कर रहा था। वो रेखा को कभी भी ये एहसास नहीं दिलाना चाहता था कि वो एक बाँझ है।

पार्टी खत्म हो चुकी थी रात के करीबन 2.30 बज रहे थे। दोनों थक चुके थे और बिस्तर पर लेटे हुए थे। दोनों पार्टी और पार्टी में आये हुए रिश्तेदारों के बारे में बात कर रहे थे। तभी रेखा को याद आता है कि आज पीरियड्स के बाद का 10वां दिन है। वो सुदीप को सेक्स के लिए कहने लगती है और उसे भी 10वें दिन के बारे में बताती है। सुदीप थक चुका था, पार्टी से नहीं रेखा की उम्मीदों से। उम्मीदें परिणाम के आधार पर जीवित रहतीं है। अगर सुलभ परिणाम आ रहे हैं तो उम्मीदें बढ़ने लगती है और अगर परिणाम नहीं आ रहे तो उम्मीदें मरने लगतीं हैं।

सुदीप रेखा की उम्मीदें मरने नहीं देना चाहता था। उसकी उम्र ही क्या थी अभी पिछले महीने ही तो वो 30 साल की हुई थी। दोनों अपनी धुंधली उम्मीदों को ज़िंदा रखने के लिए एक दूसरे के आगोश में समा जाते हैं।

सम्भोग करने के दौरान हम इंसान नहीं रहते, हम भगवान हो जाते हैं क्योंकि हमारे अंदर एक शक्ति आ जाती है- एक जीव को पैदा करने की। हर महीने एक हफ्ते का ऎसा समय आता है जहाँ रेखा और सुदीप अपनी इन्हीं शक्तियों को बेहतर परिणाम के लिए प्रयोग करते हैं लेकिन अभी तक असफल रहे हैं।
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पिछले कुछ हफ्तों से रेखा की तबीयत ठीक नहीं चल रही है सुदीप का भी बाहर आना-जाना लगा हुआ है। दोनों एक दूसरे की परेशानियों को बांट नहीं पा रहे हैं। दोनों बेचैन हैं। दोनों को एक-दूसरे की चिंता लगी रहती है।

तुम काफी सुस्त लग रही हो’
नाश्ते की टेबल पर बैठा सुदीप रेखा को देख कर बोला।
‘हाँ थोड़ा कमजोरी महसूस हो रही’
रेखा ने जवाब दिया और बाथरूम की तरफ भागी और उल्टियां करने लगी।
सुदीप नाश्ता छोड़ कर बाथरूम पहुंचा और पीठ सहला कर उसे उल्टियां कराने लगा।

रेखा को पानी पीला कर सुदीप उसे बेडरूम लाया और लिटा दिया और उसके पास बैठ गया। रेखा उसकी तरफ देख मुस्कराने लगी। दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और खुश हो रहे थे। पिछले 6-7 साल में ऎसा पहली बार हुआ था। कुछ लाल और पीली सी उल्टी जिसे देख कर आमतौर पर घिन आ जाए आज वही उल्टी दोनों को सबसे खूबसूरत चीज लग रही थी। उन्होंने इसके बारे में डॉक्टर से सुना था, वो सारे शब्द याद आ रहे थे।

रेखा कुछ कहती उसके पहले ही सुदीप घर से बाहर आ कर मेडिकल शॉप की तरफ भागा। प्रेग्नेंसी टेस्टिंग किट लेकर वो तुरंत वापस आया और रेखा के हाथ में रख दिया। रेखा बाथरूम की तरफ दौड़ी। 

सब कुछ थम सा गया था। बाथरूम के बाहर सुदीप रेखा का इंतजार कर रहा था। सुदीप को नहीं लग रहा था कि जो वो और रेखा सोच रहे हैं वो सच होगा। वो बस तसल्ली करना चाहता था रेखा के लिए। लेकिन वो चाहता था कि आज वो गलत साबित हो। रेखा का विश्वास जीते। उसकी उम्मीदें पूरी हों। जिंदगी में कई ऐसी घटनायें होती हैं जिनका आपको रिजल्ट पहले से पता होता है कि निगेटिव ही आयगा लेकिन आप चाहते हो कि पॉजिटिव आए। 

दरवाजा खुला रेखा बाहर आई और मायूस चेहरा बनाकर गर्दन हिला दी….. न। टेस्ट किट ने नेगेटिव बताया। आज सुदीप रिजल्ट पॉजिटिव चाहता था। वो रेखा को दूसरी किट लाने का बोल कर मेडिकल की दुकान की तरफ फिर दौड़ा। 

दूसरी किट ने भी नेगेटिव बताया। रेखा को उल्टियां अब भी आ रही हैं, दोनों परेशान है, दोनों को लग रहा कि शायद दोनों किट खराब थीं। सुदीप ने डॉक्टर के पास चलने को कहा लेकिन रेखा ने मना कर दिया और कल चलने की बात कही। 

शाम तक रेखा की हालत खराब होने लगी सुदीप माना नहीं और उसे डॉक्टर के पास ले गया। डॉक्टर ने कई टेस्ट किए और रिपोर्ट कल लेने आने की बात कही। कुछ दवाएं देकर उन्होंने रेखा को आराम करने की सलाह दी। 

रात को रेखा को ब्लिडिंग होने लगी। खून इतनी तेजी से बह रहा था कि उठते-उठते बेड शीट लाल हो चुकी थी। बाथरूम पहुंचते ही रेखा बेहोश हो गई। सुदीप उसे लेकर गाड़ी से अस्पताल पहुंचा। उसके दिमाग में दो चीज़े चल रहीं थीं पहली ये कि रेखा प्रेग्नेंट थी और दूसरी ये कि अब उसका गर्भपात हो चुका है। 

सुबह हो चुकी है लेकिन सुदीप अब भी रेखा की उम्मीदों को अंधेरे में ढूंढ रहा है। डॉक्टर ने उसे रात में ही बता दिया था कि रेखा प्रेगनेंट नहीं है, न ही उसका गर्भपात हुआ है। पिछले कुछ महीने से ठीक से पीरियड्स न होने के कारण वह कुछ टेबलेट्स खा रही थी और ये उसी का असर था। 

आज उस बात को तीन महीने हो चुके हैं, संडे का दिन है और दोनों घर पर बैठकर फिल्म देख रहे हैं। तभी रेखा कुछ असहज होती है और मुँह दबाकर बाथरूम की तरफ भागती है….

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