जानें, कैसे शुरू हुई गिनेस बुक ऑफ रेकॉर्ड
वैसे तो देश की कोई ऑफिशल रेकॉर्ड बुक नहीं है लेकिन 1990 से रेकॉर्ड रखने का काम लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड कर रही है।


1951 की बात है। ह्यू बीवर एक दिन अपने दोस्तों के साथ चिड़ियों का शिकार करने निकले। दोस्तों का यह शिकारी झुंड कुछ समझ पाता, इससे पहले ही उनके सामने से चिड़ियों का एक झुंड बहुत तेजी से निकल गया। ह्यू और उनके दोस्त हैरत में पड़ गए कि आखिर ये कौन-सी चिड़िया है, जो इतनी तेज उड़ती है। कोई बोला कि यार, ये बया है तो किसी ने तीतर का नाम लिया, लेकिन मामला किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा। लाख जतन के बाद भी ह्यू को किसी किताब में इस बारे में जानकारी नहीं मिली। ह्यू अपने काम में लगे रहे। 1954 में एक किताब में उन्हें सवाल का जवाब मिला लेकिन वह भी कोई खास प्रमाणिक नहीं था। 

इस घटना से ह्यू बीवर के मन में यह बात आई कि उनकी तरह कई लोगों के मन में ऐसे सवाल आते होंगे और जवाब न मिलने पर वे बेहद निराश होते होंगे। ह्यू ने अपने दोस्तों से इसे डिस्कस किया। दोस्तों ने उन्हें लंदन में डेटा जुटाने वाले दो लोगों नॉरिस और रॉस मैकवर्टर का पता दिया। तीनों ने मिलकर 1955 में पहली गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स निकाली और फिर धीरे-धीरे यह नई किताब लोगों को खूब पसंद आई। 

इंडिया की रेकॉर्ड बुक 
वैसे तो देश की कोई ऑफिशल रेकॉर्ड बुक नहीं है लेकिन 1990 से रेकॉर्ड रखने का काम लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड कर रही है। देश के लेवल का कोई भी रेकॉर्ड बनाने के लिए इसमें रजिस्टर कराने भी वैसा ही सिस्टम है, जैसे गिनेस बुक ऑफ रेकॉर्ड का है। अगर नायाब किया है तो लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड की तैयारी करो।

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