80 रुपए हुआ प्याज का भाव, दिसंबर में मिलेगी राहत
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सर्दियों के मौसम में सब्जियों के भाव आम आदमी के पसीने छुड़ा रहे हैं. दिल्ली में कम सप्लाई की वजह से रिटेल में प्याज की कीमतें 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. देश के अन्य हिस्सों में भी ये 50-70 रुपये प्रति किलो मिल रही है. ट्रेडर्स का कहना है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश से कम सप्लाई के चलते होलसेल और रिटेल मार्केट में प्याज की कीमतें बढ़ रही हैं. हालांकि, अगले एक महीने में आवक बेहतर होने से कीमतें घटने की उम्मीद लगाई जा रही है.

दिल्ली में प्याज और टमाटर का रिटेल भाव
> प्याज 55-80 रुपए प्रति किलो
> टमाटर 55-80 रुपए प्रति किलो

पिछले हफ्ते का रिटेल प्राइस
> प्याज-45-70 रुपए प्रति किलो
> टमाटर -50 -70 रुपए प्रित किलो

देश के अन्य हिस्सों में भाव
केंद्रीय उपभोक्ता विभाग के मुताबिक देश के पूर्वी हिस्से में मिजोरम की राजधानी आईजोल में प्याज का रिटेल भाव 70 रुपए प्रति किलो हो गया है. वहीं, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 45 रुपए, गुजरात के अहमदाबाद में 32 रुपए, मुंबई में 50 रुपए, कोलकाता में 55 रुपए और बिहार के पटना में 50 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया.

सरकार ने उठाए कदम
प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एमईपी (मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस) तय कर दिया है. 31 दिसंबर के लिए इसका एमईपी 850 डॉलर प्रति टन तय किया गया है.

नवंबर महीने की शुरुआत में सरकारी एजेंसी MMTC ने 2,000 टन प्याज के इंपोर्ट का टेंडर दिया था. यह कदम प्याज की कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए था. लेकिन पाकिस्तान ने प्याज के एक्सपोर्ट पर रोक  लगा दी. वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी इसका प्राइस अधिक है.

कब मिलेगी राहत
आजादपुर सब्जी मंडी की आलू-प्याज एसोसिएशन के जनरल सेकेट्री राजेंद्र कुमार ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि सब्जियों के दामों में जल्द गिरावट देखने को मिलेगी, क्योंकि ज्यादातर सब्जी उत्पादक राज्यों में बारिश रुक चुकी है. लिहाजा दिल्ली और आसपास के राज्यों में आवक बढ़ने वाली है.

प्याज की पैदावार ज्यादा
इस साल प्याज की पैदावार ज्यादा हुई है. नवंबर के दौरान आवक भी बढ़ी है जिससे आने वाले दिनों में थोक बाजार में भाव घट सकता है. लंबी अवधि में रिटेल मार्केट में भी इसकी कीमतों में नरमी आ सकती है. लासलगांव में प्याज की आवक की बात करें तो नवंबर में 28 नवंबर तक मासिक आवक 2.27 लाख क्विंटल रही है जबकि पिछले साल नवंबर में कुल आवक 1.57 लाख क्विंटल दर्ज की गई थी. इसका मतलब साफ है कि अगर आवक ज्यादा रही है तो अगले एक महीने में कीमतें घटती हुई नजर आएंगी.

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