उत्तर प्रदेश: भिखारियों ने भी एक रुपये के 'छोटे सिक्के' को लेने से किया इनकार
उत्तर प्रदेश के रामपुर के भिखारियों के एक समूह ने तय किया है कि वह भीख में एक रुपये का सिक्का नहीं लेंगे.


रामपुर : एक रुपये के सिक्के के आकार से नाखुश उत्तर प्रदेश के रामपुर के भिखारियों के एक समूह ने तय किया है कि वह भीख में एक रुपये का सिक्का नहीं लेंगे.

एक भिखारी शुक्र मनि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर किया था, अब हम एक रुपये के सिक्के को चलन से बाहर कर रहे हैं, क्योंकि इसका आकार 50 पैसे के सिक्के जैसा है. भिखारियों ने आरोप लगाया कि दुकानदार और रिक्शा वाले भी सिक्के का आकार छोटा होने के कारण उनसे यह सिक्का नहीं लेते हैं. 

मालूम हो कि मोदी सरकार ने पिछले साल आठ नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा की थी और जिन लोगों के पास भी ये नोट थे उन्हें 30 दिसंबर 2016 तक बैंकों में जमा कराने को कहा. हालांकि, प्रवासी भारतीयों और इस अवधि के दौरान विदेश गये लोगों के लिये नोट बैंकों में जमा कराने की अलग समयसीमा रखी गई थी. इस क़दम का देश की एक अरब से अधिक आबादी पर असर पड़ा. 2016 में हुई इस नोटबंदी को हाल के इतिहास में किसी भी देश के सबसे अधिक असर डालने वाले आर्थिक नीतिगत फ़ैसले में शुमार किया जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवंबर को अपने भाषण में कहा था कि नोटबंदी के फ़ैसले के पीछे तीन कारण थे- पहला- काले धन को समाप्त करना, दूसरा- जाली नोटों की समस्या को हल करना और तीसरा- आतंकवाद के आर्थिक स्रोतों को बंद करना. सरकार के इस फैसले के बाद अपने पैसे निकालने और नोटों को बदलने के लिए के लिए बैंकों के एटीएम और बैंकों में लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई थीं. इस तरह लोगों के सामने नक़दी का संकट खड़ा हो गया था.

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