नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम, इन फैसलों से बेजोस बने दुनिया के सबसे अमीर शख्‍स
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अगर आपके पास दूर की सोच है और जीवन में बड़े निर्णय लेने से नहीं चूकते तो आप भी एक सफल बिजनेसमैन बन सकते हैं. दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन डॉटकॉम के सीईओ जेफ बेजोस इन्हीं चीजों को फोलो करते हुए आगे बढ़े हैं. फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार जेफ बेजोस 6 मार्च, 2018 की तारीख में दु‍निया केे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं.

नौकरी छोड़कर शुरू की थी कंपनी: जेफ बेजोस ने नौकरी छोड़कर अमेजन शुरू करने के मामले में 'मिनिमम रिमॉर्स' की नीति के आधार पर यह निर्णय लिया. उन्होंने सोचा कि 80 साल की उम्र में उन्हें नौकरी छोड़ने का अफसोस नहीं होगा, लेकिन इस बात का अफसोस जरूर होगा कि उन्होंने ऑनलाइन गोल्ड रश से फायदा नहीं उठाया. ये बात उन्होंने कई बार अपने इंटरव्यू में कही है.

1994 में शुरू की थी कंपनी: जेफ बेजोस ने जुलाई 1994 में अपनी कंपनी की स्थापना की और 1995 में काम शुरू किया. बेजोस पहले तो इसका नाम केडेब्रा डॉट कॉम रखना चाहते थे, लेकिन 3 महीने बाद उन्होंने इसका नाम बदलकर अमेजन डॉट कॉम कर दिया.

अमेजन के नाम पर रखा कंपनी का नाम: उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी नदी अमेजन का नाम इसलिए चुना, क्योंकि वे दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन बुक सेलर कंपनी बनना चाहते थे. उनकी वेबसाइट ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में शुरू हुई, लेकिन बाद में डीवीडी, सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े भी बेचने लगे.

शुरुआती पूंजी माता-पिता से मिली थी: अमेजन कंपनी गैराज में शुरू हुई थी. केवल 3 कंप्यूटर से ऑनलाइन बिक्री का सॉफ्टवेयर खुद बेजोस ने बनाया था. तीन लाख डॉलर की शुरुआती पूंजी उनके माता-पिता ने लगाई थी. कंपनी की स्थापना के वक्‍त उनके पिता ने उनसे पहला सवाल यह पूछा था, 'इन्टरनेट क्या होता है ?' इस पर उनकी मां ने जवाब देते हुए कहा था कि 'हमने इंटरनेट पर नहीं जेफ पर दांव लगाया है.

शुरुआत में बुक बेचते थे: 16 जुलाई 1995 को जेफ बेजोस ने अपनी वेबसाइट पर बुक बेचनी शुरू की. पहले ही महीने में अमेजन ने अमेरिका के 50 राज्यों और 45 अन्य देशों में बुक्स बेच डालीं, लेकिन ये काम आसान नहीं था. जमीन पर घुटनों के बल बैठकर किताबों को पैक करना पड़ता था और पार्सल देने के लिए खुद भी जाना पड़ता था. बुक की पैकिंग करते समय एक दिन जेफ बेजोस ने अपने साथी से पुछा, 'तुम्हें पता है हमें इस काम को आसान बनाने के लिए क्या करना चाहिए?' साथी ने जवाब दिया, 'हां घुटनों के नीचे तकिया रख लेना चाहिए. जेफ बेजोस हंस पड़े और अगले ही दिन उन्होंने कुछ टेबल खरीद ली, ताकि उन पर किताबों की पैकिंग की जा सके. बेजोस की मेहनत रंग लाई और सितंबर 1995 तक हर सप्ताह 20,000 डॉलर की बिक्री होने लगी.

2007 में आया बड़ा मोड़: 2007 तक अमेजन डॉट कॉम ऑनलाइन बिक्री की स्थापित कंपनी बन चुकी थी, लेकिन कंपनी के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ नवम्बर 2007 में आया, जब अमेजन ने अमेजन किन्डल नामक ई-बुक रीडर बाजार में उतारा, जिसके माध्यम से पुस्तक को तुरंत डाउनलोड करके पढ़ा जा सकता था. इससे कंपनी को बड़ा प्रॉफिट हुआ. इससे एक तो किन्डल की बिक्री बढ़ी, दूसरे किन्डल फोर्मेट में पढ़ी जाने वाली बुक्स की बिक्री भी बढ़ी. ग्राहकों के लिए ये बहुत सुविधाजनक था, क्योंकि अब उन्हें बुक के आने का इन्तजार नहीं करना पड़ता था और मनचाही बुक मिनटों में उनके पास आ जाती थी.

ऐसे बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू: नेट बैंकिंग का युग शुरू हुआ. इसका सबसे ज्यादा फायदा जेफ बेजोस ने उठाया. इस क्रांति ने कंपनी के रेवेन्यू को 1997 के 1 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर 12 हजार करोड़ डॉलर कर दिया. इस समय कंपनी लगभग 702 बिलियन डॉलर की है.

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