​जो फेसबुक नहीं इस्तेमाल कर रहे हैं  उनका भी डेटा हो रहा है ट्रैक
सोशल नेटवर्किंग साइट के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने स्वीकार किया कि फेसबुक उन लोगों के डेटा को भी ट्रैक करती है जो लोग फेसबुक का इस्तेमाल नहीं करते हैं।


नई दिल्ली : फेसबुक पर डेटा प्रिवेसी को लेकर अब नई जानकारी का पता चला है। दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने स्वीकार किया कि फेसबुक उन लोगों के डेटा को भी ट्रैक करती है जो लोग फेसबुक का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उन्होंने माना कि फेसबुक उनका भी डेटा इकट्ठा करती है जो उसके रजिस्टर्ड यूजर नहीं हैं, लेकिन इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। ज़करबर्ग के इस बयान के बाद एक बार फिर फेसबुक पर डेटा प्रिवेसी को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।


पिछले महीने खुलासा हुआ था कि फेसबुक ने अपने कई लाख यूजर्स का निजी डेटा, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कैम्ब्रिज़ ऐनालिटिका के साथ साझा किया था। फेसबुक यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।

बुधवार को अमेरिकी रिप्रेजेंटेटिव बेन लुजान ने डेटा प्रिवेसी पर ज़करबर्ग से पूछा कि, 'फेसबुक उन लोगों का डेटा भी इकट्ठा करता है, जिन्होंने फेसबुक पर साइनअप नहीं किया है। और आप कहते हैं कि आपका डेटा पर कंट्रोल है।' ज़करबर्ग ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया। 

इस खुलासे के बाद वकीलों ने कहा कि फेसबुक को ऐसा तरीका लाना होगा ताकि फेसबुक न इस्तेमाल करने वाले लोग जान सकें कि सोशल नेटवर्किंग साइट के पास उनकी कौन-कौन सी जानकारियां हैं। बता दें कि इससे पहले फेसबुक ने कहा था कि इस तरह के टूल को बनाने की कोई योजना नहीं थी। 


हर जगह मौज़ूद हैं कुकीज़ 
नॉन-फेसबुक यूजर्स का डेटा कंपनी अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स से इकट्ठा करती है, जैसे जब कोई यूज़र अपने किसी दोस्त का ईमेल अपलोड करता है। इसके अलावा दूसरी जानकारी 'cookies' से आती हैं, छोटी फाइल्स को एक ब्राउज़र के जरिए स्टोर किया जाता है और फेसबुक इन्हें इंटरनेट पर दूसरे लोगों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल करता है। कई बार इस जानकारी को विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रॉयटर्स को दिए एक बयान में फेसबुक ने कहा, 'डेटा इकट्ठा करने का यह तरीका बताता है कि इंटरनेट किस तरह काम करता है।' 

लोगों द्वारा इस जानकारी को न देने के तरीके पर फेसबुक ने बताया, 'कुछ बेसिक चीजें हैं, जिसके जरिए ऐडवरटाइज़िंग के लिए इस जानकारी को सीमित किया जा सकता है जैसे कि कुकीज़ को डिलीट करने के लिए ब्राउज़र या डिवाइस की सेटिंग का इस्तेमाल करना। यह तरीका फेसबुक के अलावा सभी जगह काम करेग, जैसा कि पहले बताया कि यह इंटरनेट के काम करने के तरीके पर निर्भर करता है।' 

अगर यूजर्स किसी ऐसी साइट पर जाते हैं जहां फेसबुक के 'like' और 'share' बटन मौज़ूद हैं और वे इस पर टैप भी नहीं करते तो भी फेसबुक नॉन-यूजर्स के ब्राउज़र पर कुकीज़ इंस्टॉल कर लेता है। फेसबुक ने कहा कि ऐनालिटिक रिपोर्ट्स बनाने के लिए इस ब्राउज़िंग डेटा का इस्तेमाल होता है। कंपनी ने बताया कि कि इस डेटा का इस्तेमाल टारगेट ऐड्स के लिए नहीं, बल्कि लोगों को फेसबुक ज़्वॉइन के इनविटेशन के लिए होता है। 

ज़करबर्ग ने कहा कि इस डेटा को सुरक्षा कारणों से इकट्ठा किया गया था। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस डेटा को किसी तरह के ऐनालिटिक्स के लिए या किसी और काम के लिए भी इस्तेमाल किया गया या नहीं। फेसबुक ने मार्क ज़करबर्ग द्वारा डेटा पर सिर्फ सुरक्षा कारणों का हवाला देने पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया। 

इसके अलावा फेसबुक द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के ईमेल और कॉन्टेक्ट लिस्ट से भी नॉन-यूजर्स की जानकारी इकट्ठा करने की खबरें हैं। 

यूरोपियन यूनियन लॉ जिसे जनरल डेटा प्रॉटे्शन रेगुलेशन (GDPR) ने मई से फेसबुक में ‘प्राइवेसी ऑप्शन’ देने को कहा है। जकरबर्ग ने दुनियाभर के यूजर्स को यह विकल्प दिए जाने की बात कही है। 

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