खादी दुनियाभर में फैला रही है पैर, त्रिनिदाद-टोबैगो तक बिक रहा सामान
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नई दिल्ली: देश की खादी दुनियाभर में अपने पैर फैला रही है और इसी क्रम में उसने उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र के दो जुड़वां देश त्रिनिदाद और टोबैगो तक अपना माल पहुंचाया है. भारत से यह माल दो अगस्त को रवाना हुआ है. त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय उच्चायुक्त इसे प्राप्त करेंगे. खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने एक बयान में कहा कि त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय उच्चायुक्त विश्वदीप डे ने जुलाई में आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना से मुलाकात की थी. भारतीय उच्चायोग ने वहां इस साल स्वतंत्रता दिवस पर कुछ गणमान्य लोगों को खादी के उपहार देने का निर्णय किया है. 

इन उपहारों में खादी के 200 फेस टॉवेल कागज के बक्से में पैक किए गए हैं.  जबकि 150 फेस टॉवेल लकड़ी के बक्से में पैक किए गए हैं. भारतीय उच्चायोग ने खादी योग किट, योग चटाई, डायरी इत्यादि खरीदने की भी इच्छा जतायी है. 

मोटे खादी बुनाई के लिए नया चरखा पेश,बढ़ेगी कारीगरों की आमदनी
खादी और ग्रामोद्योग आयोग केवीआईसी ने मोटे खादी बुनाई के लिए छः और आठ स्पिंडल धुरी वाला चरखा पेश किया है. सूक्ष्म, लघु एवं मंझौले उपक्रम मंत्री गिरिराज सिंह ने हाल ही में अहमदाबाद में नए चरखे का अनावरण किया. इस दौरान खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन वी के सक्सेना भी मौजूद रहें. छ: धुरी वाले चरखे का निर्माण अहमदाबाद की खादी प्रयोग समिति ने किया है. इसकी स्थापना खादी गतिविधियों में तकनीकी उन्नतिकरण के लिए 1958 में की गई थी. चरखा तकनीकी के विकास और शोध के लिए केवीआईसी ने जून में प्रयोग समिति को 15 लाख रुपये दिए थे.

विज्ञप्ति के मुताबिक, वर्तमान में मोटे खादी वाले धागे का उत्पादन पारंपरिक एकल-धुरी चरखे से होता है, जो प्रतिदिन केवल चार से पांच हेंक का उत्पादन कर सकता है.  जिससे कारीगरों को बहुत कम आय होती है. आगे कहा गया है कि नए 6 और 8 धुरी वाला चरखा कम से कम 20 से 25 हेंक प्रतिदिन का उत्पादन करता है.इससे कारीगरों की आय में वृद्धि होगी अर्थात वो प्रतिदिन 200 रुपये या इससे ज्यादा कमा सकते हैं.  

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