मिस्‍त्री देंगे फैसले को चुनौती : रिपोर्ट
टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन सायरस पलोनजी मिस्त्री खुद को हटाए जाने के फैसले खिलाफ कोर्ट में जा सकते हैं।


मुंबई : टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन सायरस पलोनजी मिस्त्री खुद को हटाए जाने के फैसले खिलाफ कोर्ट में जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले को मिस्त्री कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि मिस्त्री के ग्रुप ने इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में जाने की बात कही है। मिस्त्री को हटाने के बाद टाटा ग्रुप के सबसे बड़े हिस्‍सेदार शापूरजी और पालोनजी ग्रुप ने इस फैसले को अवैध बताया था और इसे कानूनी चुनौती देने की बात कही है।

मिस्त्री को हटाने का निर्णय यहां टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक के बाद किया गया। अड़तालीस वर्षीय मिस्त्री की जगह 78 वर्षीय रतन टाटा को कंपनी के अंतरिम चेयरमैन पद की जिम्मेदारी दी गई है। रतन टाटा ने कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में कहा है कि उन्होंने ‘समूह में स्थिरता और भरोसे को बनाए रखने के लिए अंतरित चेयरमैन की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है।’ मिस्त्री को हटाने का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

टाटा संस ने साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाया

मिस्त्री ने चार साल पहले इस विशाल कंपनी समूह के मुखिया का पद रतन टाटा से ही संभाला था। वह 15 दशकों से काम कर रही इस कंपनी के छठे चेयरमैन बने थे। उनका कार्यकाल सबसे कम रहा है। मिस्त्री की पारिवारिक कंपनी शापूरजी पालोनजी की टाटा समूह में 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा परिवार से जुड़े ट्रस्टों के पास है। गौर हो कि सोमवार को टाटा ग्रुप ने मिस्त्री को हटाते हुए उनकी जगह रतन टाटा को अंतिम चेयरमैन नियुक्त किया है। मिस्त्री निर्माण क्षेत्र के दिग्गज पालोनजी मिस्त्री के छोटे पुत्र हैं। मिस्त्री का जन्म चार जुलाई 1968 को हुआ था और उन्होंने लंदन के इंपीरियल कॉलेज ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड मेडिसन से सिविल इंजीयिरिंग में स्नातक किया। बाद में उन्होंने लंदन बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में परास्नातक किया।

टाटा संस के चेयरमैन पद पर मिस्त्री का चुनाव पांच सदस्यीय एक समिति ने किया था। मिस्त्री ने रतन टाटा के 75 वर्ष की आयु पूरी करने पर उनकी सेवानिवृत्त के बाद 29 दिसंबर 2012 को चेयरमैन का पद भार संभाला था। मिस्त्री वर्ष 2006 से कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल रहे हैं। कंपनी के सबसे बड़े हिस्सेदार शापूरजी पालोनजी ने कंपनी के चेयरमैन पद के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी। सूत्रों के अनुसार समूह की कारोबारी कंपनियों में मुख्य कार्यकारी स्तर पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। टाटा संस ने मिस्त्री को हटाने का कारण नहीं बताया है। उन्हें बहुत धूमधड़ाके के साथ कंपनी की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।

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