Budget 2019: किसानों को मोदी सरकार की घोषणा से ज्यादा पहले से ही दे रही हैं ये राज्य सरकारें
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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम बजट में किसानों को लुभाने के लिए उनके खाते में 6000 रुपये सालाना सीधे बैंक खाते में डालने का दांव चला गया है. लेकिन इस घोषणा से पहले ही दो सरकारें किसानों को इससे अधिक की सहायता दे रही हैं. तेलंगाना में किसानों को 8000 रुपये सालाना मिल रहा है. ओडिशा में 10,000 रुपये दिए जाने का ऐलान हुआ है. इसे लेकर विपक्ष और कुछ कृषि विशेषज्ञों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.

कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा ने सवाल उठाया है कि जब दो राज्य सरकारें आठ से 10 हजार रुपये सालाना दे रही हैं तो केंद्र सरकार इतनी कम रकम क्यों प्रस्तावित कर रही है. यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिन राज्यों में किसानों को पहले से ही इस तरह की सहायता मिल रही है उन्हें मोदी सरकार की इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं. छह हजार रुपये काफी कम हैं. उधर, मोदी सरकार के ऐलान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी तंज कसा है. राहुल ने कहा है कि रोज 17 रुपये देना किसानों का अपमान है

कृषि कर्जमाफी के मसले पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से मात खाने वाली बीजेपी ने कर्जमाफी स्कीम की काट के लिए किसानों को उनके खाते में सीधे पैसा डालने वाली स्कीम ले आई है. पीयूष गोयल के मुताबिक, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छोटे किसान जिनके पास दो हेक्टेयर जमीन है, उनके बैंक खाते में पैसे जाएंगे. इसका फायदा किसानों को दिसंबर 2018 से मिलेगा. ये पैसे दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में मिलेगा. पीएम किसान योजना का अनुमानित खर्चा 75 हजार करोड़ रुपये होगा. सरकार ने इस योजना से 12 करोड़ किसानों को लक्ष्य किया है.

आइए जानते हैं कि ओडिशा और तेलंगाना में सरकारें किसानों के लिए क्या कर रही हैं. भाजपा की झारखंड सरकार ने भी किसानों को सीधे कैश देने का एलान किया हुआ है.

ओडिशा मॉडल

ओडिशा कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये की 'जीविकोपार्जन एवं आय वृद्धि के लिए कृषक सहायता' Krushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation (KALIA) को दी मंजूरी है. इसके तहत ओडिशा के छोटे किसानों को रबी और खरीफ में बुआई के लिए प्रति सीजन 5-5 हजार रुपये की वित्तीय मदद मिलेगी.

ओडिशा सरकार की इस स्कीम में कृषि कर्जमाफी जैसे प्रावधान शामिल नहीं हैं, लेकिन, इस स्कीम के तहत सूबे के सभी छोटे और सीमांत किसानों को कवर किया जाएगा. खरीफ और रबी के सीजन में बुआई के लिए आर्थिक मदद के तौर पर प्रति परिवार को 5-5 हजार रुपये यानी सालाना 10,000 रुपये दिए जाएंगे.

नवीन पटनायक सरकार ने इस योजना के तहत 50 हजार रुपये का फसल ऋण 0% ब्याज पर देने का प्रावधान भी किया है. जबकि अन्य जगहों पर अभी किसानों को कृषि कर्ज के लिए कम से कम चार फीसदी ब्याज देना होता है. बिना ब्याज वाला लोन खरीफ सीजन के लिए मिलेगा. सरकारी कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा. दलित-आदिवासी भूमिहीन लोगों को कृषि से जुड़े काम करने के लिए 12,500 रुपये की सहायता देने का फैसला लिया है.

तेलंगाना मॉडल

तेलंगाना में सरकार फसलों की बुआई से पहले प्रति एकड़ तय राशि सीधे खाते में भेजकर किसानों को लाभ देती है. यहां के किसानों को प्रति वर्ष प्रति फसल 4000 रुपये एकड़ की रकम दी जाती है. दो फसल के हिसाब से किसानों को हर साल 8000 रुपये प्रति एकड़ मिल जाते हैं.

झारखंड मॉडल

झारखंड की रघुबर दास सरकार ने मध्यम और सीमांत किसानों के लिए 2,250 करोड़ की योजना का किया एलान किया है. यहां पांच एकड़ तक खेत पर सालाना प्रति एकड़ 5000 रुपये मिलेंगे. एक एकड़ से कम खेत पर भी 5000 हजार रुपये की सहायता मिलेगी. स्कीम की शुरुआत 2019-20 वित्त वर्ष से होगी. लाभार्थियों को चेक या डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए पैसे दिए जाएंगे.

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