नोटबंदी से जमीनों का कारोबार आधा हुआ
नोटबंदी से जमीनों का कारोबार आधा हुआ


जगदलपुर: नोटबंदी के बाद यहां यदि किसी कारोबार पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है वह जमीन की खरीदी बिक्री में देखने को मिला है। हालात यह है कि जमीनों का कारोबार आधा रह गया है। उप पंजीयक कार्यालय में जहां रोजाना 6-7 जमीनों का पंजीयन होता था वहां वर्तमान में बमुश्किल 3-4 पंजीयन ही किए जा रहे हैं। जमीन की खरीदी बिक्री का ज्यादातर कारोबार नगदी ही चलता है, लेकिन अब भुगतान नगदी की जगह चैक अथवा ऑनलाइन करने की बाध्यता के चलते लोग नई प्रापर्टी खरीदने से पीछे हट रहे हैं। प्रापर्टी कारोबार को उठने में काफी समय लग सकता है। पिछले दो महीने के दौरान रजिस्ट्री दफ्तर आने वालों की संख्या भी कम हो गई है। 
नोटबंदी के पहले 1 नवंबर 2016 से 8 नवंबर के बीच के 8 दिनों में 59 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया था। इसमें स्टांप शुल्क 26 लाख 30 हजार सरकारी खजाने में जमा किया गया। नोटबंदी के बाद 9 नवंबर से 30 नवंबर तक सिर्फ 102 दस्तावेज ही आ सके हैं जिसमें सरकार को 63 लाख 6 हजार रुपये का शुल्क मिला है जबकि पिछले माह दिसंबर में 131 दस्तावेजों के पंजीयन से 65 लाख 13 हजार रुपये का शुल्क मिला है।
जिला पंजीयन कार्यालय के जानकारी के मुताबिक नवंबर 2015 में 226 दस्तावेज स को एक करोड़ 10 लाख 59800 रुपयेकी आय प्राप्त हुई थी। वहीं दिसंबर 2015 में 233 रजिस्ट्री में एक करोड़ एक लाख 92500 रुपये बतौर शुल्क मिले थे। नवंबर 2016 में 160 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था, जबकि 2015 की तुलना में नोटबंदी के 2 माह कारोबार ठंडा रहा। नवंबर में 161 रजिस्ट्री हुई जिसमें 99 अचल संपत्ति का क्रय-विक्रय, 26 अनुबंध, 24 लीज, 5 दान, 3 पावर ऑफ अटार्नी व वसीयत और बंटवारा के 2-2 दस्तावेज शामिल हैं।
 दिसंबर में 138 रजिस्ट्री हुई जिसमें 87 अचल संपत्ति का क्रय-विक्रय, 31 लीज, 7 अनुबंध, 6 पावर ऑफ अटार्नी, 5 वसीयत एवं 2 दान के दस्तावेज शामिल हैं जबकि नवंबर 2015 में 160 एवं दिसंबर 2015 में 174 रजिस्ट्री अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय से संबंधित किए गए हैं। एमआर भूआर्य, उप पंजीयक के मुताबिक नोटबंदी का व्यापक असर दिख रहा है। रोजाना 3 से 4 दस्तावेज कार्यालय पहुंच रहे हैं जो पहले 6 से 7 तक होता था।

अधिक बिज़नेस की खबरें