आइडिया लाएगा जियोफोन का राइवल
आइडिया का कहना है कि इस फोन पर सिर्फ वही ऐप्स चलेंगे जो ऑपरेटर की पसंद के होंगे।


नई दिल्ली : जियोफोन के ऐलान के बाद प्रतिद्वंद्वी कम्पनी आइडिया ने नेट न्यूट्रैलिटी की बहस को हवा दे दी है। आइडिया का कहना है कि इस फोन पर सिर्फ वही ऐप्स चलेंगे जो ऑपरेटर की पसंद के होंगे। यह नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ होगा। इस फोन के मुकाबले के लिए वह इससे थोड़ा-सा महंगा हैंडसेट लेकर आएगी।

एक ऐनालिस्ट कॉल में आइडिया सेल्युलर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हिमांशु कपानिया ने कहा, 'हमें नेट न्यूट्रैलिटी की फिक्र है। इस फोन में कस्टमर की पसंद के अधिकतर ऐप नहीं डल सकेंगे और इस वजह से ग्राहकों को ऑपरेटर विशेष के ऐप इस्तेमाल करने होंगे।'

कपानिया ने आगे कहा कि यह देखा जाना अभी बाकी है कि जियोफोन, जो कि एक स्मार्टफोन के फीचर्स के साथ नहीं आ रहा, इंटरनेट ब्राउज करने की चाहत रखने वालों के किस तरह काम आएगा। उन्होंने कहा, 'साफ तौर पर वॉइस यूज वाले ग्राहकों के लिए यह अच्छा होगा, लेकिन इंटरनेट चलाने वालों के लिए यह किस तरह काम करेगा, यह देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा।'

उन्होंने कहा कि आदित्य बिड़ला ग्रुप की कम्पनी, जो कि बड़े प्रतिद्वंद्वी वोडाफोन के साथ मर्ज हो रही है, हैंडसेट मेकरों के साथ मिलकर एक ऐसा फोन लेकर आएगी जो जियोफोन से थोड़ा महंगा होगा। लेकिन, ग्राहकों को चुनने का अधिकार देगा।

इस नए हैंडसेट में ग्राहकों को अपनी पसंद का ऑपरेटर चुनने की आज़ादी होगी। वह पॉप्युलर ऐप्स जैसे गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप वगैरह भी चुन सकेंगे।

बता दें, कि नेट न्यूट्रैलिटी दुनियाभर में एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है और पिछले साल इसपर देश में काफी विवाद हो चुका है। इसके बाद, सोशल मीडिया जायंट फेसबुक को गरीबों तक इंटरनेट पहुंचाने के अपने प्लान को बंद करना पड़ा था।

ट्राई ने नेट न्यूट्रैलिटी को सपॉर्ट किया था और आम जनता से सलाह मशविरा कर इसे पुनः परिभाषित भी किया था। कपानिया ने कहा, कि कम्पनी 2500 रु में एक नया हैंडसेट लाना चाहती है। लेकिन उन्होंने साफ कर दिया यह फोन सब्सिडाइज नहीं होगा।

जियोफोन को रिलायंस के शेयरहोल्डरों की ऐनुअल जनरल मीटिंग में पेश किया गया था। यह फोन यूजरों को जीरो कॉस्ट पर मिलेगा। शुरुआत में इसके लिए 1500 रु का डिपॉजिट देना होगा जो 3 साल बाद यूजरों को लौटा दिया जाएगा।

कपानिया ने बताया कि जियोफोन के मुकाबले ठहरने के लिए वे फीचर्स को कम कर, मटीरियल की कीमत घटाकर और ग्राहकों का रेस्पॉन्स टेस्ट कर कीमत कम करने की कोशिश करेंगे।

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