घर के दरवाजे पर ऐसे ना लगाएं गणेशजी की मूर्ति, हो जाएंगे कंगाल
घर के दरवाजे पर ऐसे ना लगाएं गणेशजी की मूर्ति, हो जाएंगे कंगाल


अक्सर हमसभी ने बहुत बार देखा है कि लोग घर के मुख्य दरवाजे पर गणेशजी की प्रतिमा, शुभ-लाभ और स्वास्तिक का चिन्ह जरूर लगाते हैं। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवी-देवताओं में भगवान गणेश प्रथम पूजनीय माने जाते हैं, इसलिए घर हो या दुकान सभी जगह गणेश जी की मूर्ति या फोटो रखी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेशजी की मूर्ति-कभी भी घर के दरवाजे पर बिना सोचे-समझे गणेशजी की मूर्ति नहीं लगाना चाहिए। जी हां, घर में एक ही जगह पर गणेशजी की दो मूर्ति भी नहीं रखना चाहिए, अशुभ होता है। 

वास्तुशास्त्र की माने तो इससे उर्जा का आपस में टकराव होता है जो अशुभ फल देता है। अगर एक से अधिक गणेश जी की मूर्ति है तो दोनों को अलग-अलग स्थानों पर रखना ही उचित होगा। बिना जाने कोई मूर्ति कहीं भी ना रखें। साथ ही गणेशजी की मूर्ति या फोटो को कभी ऐसे न रखें जिसमें वह घर के बाहर देख रहे हों। 

गणेशजी का मुख हमेशा उस दिशा में होना चाहिए जिससे वह घर की ओर देखते नजर आएं। अगर मूर्ति बाहर की ओर देखते हुए लगाएं तो ठीक इनके पीछे एक मूर्ति लगा दें ताकि गणेश जी का पीठ अंदर की तरफ नहीं दिखे। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि गणेश जी के पीठ वाले भाग में दुख और दरिद्रता का वास माना जाता है।

गणपति जी को पुराणों में विघ्नकर्ता और हर्ता दोनों कहा गया है। ऐसे में गणेशजी की मूर्ति घर में है तो आपको कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए ताकि आपके लिए ये विघ्नकर्ता ना बनें और शुभ फलों की प्राप्ति हमेशा होती रहे।

घर में गणेश जी की ऐसी प्रतिमा लगाएं...
वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर में गणेश जी की बांयीं ओर सूंड वाली मूर्ति रखना अधिक मंगलकारी माना गया है क्योंकि इनकी पूजा से जल्दी फल की प्राप्ति होती है। दायीं ओर सूंड वाले गणपति देर से प्रसन्न होते हैं। गणेश जी को विराजमान करने के लिए ब्रह्म स्थान, पूर्व दिशा और उत्तर पूर्व कोण शुभ माना गया है लेकिन भूलकर भी इन्हें दक्षिण और दक्षिण पश्चिम कोण यानी नैऋत्य में नहीं रखें इससे हानि होती है।

वास्तु शास्त्र भारतीय शास्त्रों में से एक शास्त्र है, जिसकी जड़ें प्राचीन काल से ही भारत में मौजूद है। वास्तु में दिशाओं का बड़ा महत्तव होता है। कुछ लोग घर निर्माण के समय इसका ध्यान रखतें है। लेकिन कहीं ना कहीं हर किसी से गलती हो ही जाती है। जिसके कारण नुकसान होता है।

घर में लगाने के लिए ये चिन्ह होते है शुभ...
-प्रवेश द्वार के आगे स्वास्तिक, ओम, शुभ लाभ जैसे मांगलिक चिन्हों का उपयोग करें।
-प्रवेश द्वार पर कभी भी बिना सोचे समझे गणेशजी की मूर्ति ना लगाएं।
-विवाह पत्रिका कभी भूलकर भा ना फाड़े क्योंकि इससे व्यक्ति को गुरु और मंगल का दोष लग जाता है।
-विघ्नकर्ता गणपति जी की मूर्ति स्थापित करते समय हमें दिन, दिशा, स्थान आदि बातों का ख्याल रखना चाहिए।

गणेशजी की मूर्ति कहां स्थापित करें...
गणपति आदि देवताओं का मंदिर घर के ईशान-कोण में होना चाहिए और उनकी स्थापना इस प्रकार करनी चाहिए कि उनका मुख पश्चिम की तरफ हो।
यदि साधक के इष्ट देवता गणपति जी है तो उनकी स्थापना मध्य में करके ईशान कोण में बिष्णु की, अग्निकोण में शंकर जी की स्थापना करना चाहिए।

गणेशजी की मूर्ति कब स्थापित करें...
अकसर लोग बिना सोचे समझे कभी भी जब मन में आए अपनी इच्छानुसार अपने इष्ट की मूर्ति घर ले आते है और मंदिर में स्थापित कर देते है। ऐसा करना गलत है। मूर्ति रखना है तो उस दिन रखें जिस दिन मंगलवार ना हों और तिथियों में चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी ना हो, उसके लिए चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, माघ मास शुक्ल पक्ष को ही चुने।

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