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गणेश मंदिरों में हुआ बप्पा का विशेष श्रंगार और पूजन, भक्तों की उमड़ी भीड़
आठवीं शताब्दी का श्रीगणेश मंदिर


भोपाल दस दिनी गणेशोत्सव की शुरूआत सोमवार को हो गई है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर प्रदेश भर के प्रमुख गणेश मंदिरों में भगवान गजानन का विशेष श्रंगार करने के साथ पूजा अर्चना का आयोजन किया गया। गणेश चतुर्थी के मौके पर मंदिरों की विशेष आकर्षक सजावट की गई है। सुबह से भक्त अपने अराध्य के दर्शन करने के लिए मंदिरों में पहुंच रहे है। हर कोई विघ्रहर्ता के दर्शन कर आशीर्वाद लेना चाहता है। घरों और पंडालों में गणेश स्थापना के साथ ही आगामी दस दिनों तक गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष से गली मोहल्ले और शहर गूंजित होंगे। 

चिंतामन गणेश मंदिर

भोपाल के करीब बसे सीहोर जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर वर्तमान में प्रदेश भर में अपनी ख्याति और भक्तों की अटूट आस्था को लेकर पहचाना जाता है। गणेश चतुर्थी के मौके पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीहोर चिंतामन गणेश मंदिर पहुंचे और भगवान गजानन के दर्शन कर अर्शीवाद लिया। इस मंदिर में श्रद्धालु अपनी मन्नत मानते हैं और उल्टा सातिया बनाकर जाते हैं। जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है, तो मंदिर आकर सीधा सातिया बनाकर फिर अपने घर जाते हैं।

खजराना गणेश मंदिर

इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर में देर रात से ही बप्पा के दर्शन के लिए भक्त पहुंचने लगे थे। गणेशोत्सव के मौके पर पूरे मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया है। गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश का विशेष श्रृंगार किया गया। हस्त और चित्रा नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में विराजित मंगल मूर्ति को मोदक और मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाया जाएगा। 

आठवीं शताब्दी का श्रीगणेश मंदिर

खंडवा में आठवीं शताब्दी के सराफा का श्रीगणेश मंदिर आस्था का केंद्र रहता है। इस मंदिर में विघ्नहर्ता की स्वयंभू मूर्ति विराजित है। सराफा बाजार के मध्य स्थित श्रीगणेश मंदिर में गणेशोत्सव के पहले दिन भगवान गणेश का विशेष श्रंंगार किया गया। यहां दस दिनों तक प्रतिदिन श्रीगणेश का श्रृंगार किया जाता है। यहां भी सुबह से भक्त भगवान की पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद लेने पहुंच रहे है। 

अष्टभुज गणेश मंदिर

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा विकासखंड अंतर्गत आने वाले तेजगढ़ गांव में स्थापित 500 साल पुरानी भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। यहां भगवान अष्टभुजा के रूप में विराजमान हैं। बताया जाता है कि यहां भगवान गणेश की अष्टभुजा मूर्ति 500 वर्ष पूर्व जमीन के नीचे से प्रकट हुई थी। यहां गणेशोत्सव के दौरान कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजन का आयोजन किया जाता है। 

श्वेतार्क गणेश देवस्थानम

नरसिंहपुर नगर के किसानी वार्ड स्थित श्रीदेव गणेश देवस्थानम में विराजित भगवान गणेश की पूर्वामुखी श्वेतार्क प्रतिमा ढाई सौ साल से ज्यादा प्राचीन है। सुखासन में बैठे गणेशजी की यह प्रतिमा इसलिए भी दुर्लभ है क्योंकि दक्षिणावृत्त सूंढ़ है। यहां गणेश चतुर्थी पर 11 दिवसीय अनुष्ठान की जो शुरुआत तीन दशक पूर्व की गई थी वह अब भी जारी हैं। जिसमें नियमित अभिषेक पूजन के साथ ही अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान गणेश के 1020 नामों का स्मरण कर आहुति यज्ञ किया जाता है।

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