सन्यासी थे वात्स्यायन ऋषि, फिर भी लिख डाला कामसूत्र
कांसेप्ट फोटो


आज आपको बता दें कि कामसूत्र को एक सन्यासी ने लिखा था। जानकारी के मुताबिक कामसूत्र में संभोग के प्रकार और क्रियाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण तथ्यों का संग्रह किया गया है। कामसूत्र के प्रति आमतौर पर लोगों की यह धारणा है कि यह केवल संभोग की क्रिया से जुड़ा विषय है। लेकिन यही वास्तविकता नहीं है। वास्तव में यदि सकारात्मक रूप से कामसूत्र को देखा जाए तो यह बेहद ही आनंददायक विषयों का संग्रह ग्रंथ है।


कौन थे वात्स्यायन ऋषि?

वात्स्यायन भारत वर्ष के महान ऋषि थे। उनका जन्म गुप्त वंश के समय का माना जाता है। महर्षि वात्स्यायन ने कामसूत्र में न केवल दाम्पत्य जीवन का श्रृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी संपदित किया है। इतिहासकारों में वात्स्यायन के नाम और उनके जीवनकाल को लेकर मतभेद हैं। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि नीतिसार के रचयिता कामंदक, जो कि चाणक्य के प्रधान शिष्य थे, वे ही वात्स्यायन ऋषि थे। वहीं सुबन्धु द्वारा रचित वासवदत्ता में कामसूत्र के रचनाकार का नाम 'मल्लनाग' बताया गया है। यानि वात्स्यायन का एक नाम मल्लनाग भी था।

कामसूत्र ग्रंथ जिसमें कामुक विषय का गहन ज्ञान निहित है, उसके रचनाकार वात्स्यायन स्वयं ब्रह्मचारी और एक संन्यासी थे। इसके बावजूद भी उन्हें कामुक विषय की गहन समझ थी। कहा जाता है कि वात्स्यायन ने कामसूत्र, वेश्यालयों में जाकर देखी गई मुद्राओं को नगरवधुओं और वेश्याओं के अनुभवों को लिखा। कामुकता विषय को उन्होंने कई नए और खूबसूरत आयाम दिए हैं। बनारस में लंबा वक्त बिताने वाले वात्स्यायन ऋषि बहुत ज्ञानी, दार्शनिक और चारों वेदों के ज्ञाता थे। 

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