पाकिस्तान के भक्त प्रल्हाद मंदिर से शुरू हुई थी होली
भक्त प्रल्हाद का मंदिर


मुल्तान के विश्वप्रसिद्ध किले के अंदर बना यह मंदिर किसी जमाने में मुल्तान शहर की पहचान हुआ करता था। पाकिस्तान के निर्माण के पहले होली के समय यहां विशेष पूजा अर्चना आयोजित की जाती है। 
कुछ इतिहासकार बताते हैं कि यहां दो दिनों तक होलिका दहन उत्सव मनाया जाता था। पाकिस्तान में मौजूद इस पंजाब प्रांत में होली, होलिका दहन से ९ दिनों तक मनाई जाती है। रंगों भरी होली तो यहां मनती ही है, किंतु होली मनाने की परंपरा यहां कुछ अलग है।
 पश्चिमी पंजाब और पूर्वी पंजाब में होली के दिन, मटकी फोड़ी जाती है। भारत की तरह यहां भी मटकी को ऊंचाई पर लटकाते हैं। यहां मौजूद व्यक्ति पिरामिड बनाकर मटकी फोडते हैं। मटकी में मक्खन, मिश्री भरा हुआ होता है, मटकी फोड़ते ही यह सब कुछ बिखर जाता है। यहां इसे चौक-पूर्णा त्यौहार के नाम से जाना जाता है। 
वैसे इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहीं नरसिंह भगवान ने एक खंबे से निकल कर प्रल्हाद के पिता हिरण्यकश्यप को मारा था। इसके पश्चात प्रल्हाद ने स्वंय ही इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यह भी माना जाता है कि होली का त्यौहार और होलिका दहन की प्रथा भी यही से आरंभ हुई थी।

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