मिलिए ! मिस खादी हरियाणा ‘खुशबू रावत’ से, जानिए, खादी के कपड़ों पर इनके नजरिये को
Khushboo Rawat


लखनऊ, खादी के कपड़ों के प्रमोशन के लिए देश भर में लगातार आयोजित हो रहे मिस खादी इंडिया के फैशन शोज की माडल्स से मिलवाने के क्रम आज हम आपकी मुलाकात करायेंगे मिस खादी हरियाणा ‘खुशबो रावत’ से और जानेगें  खादी के प्रति उनके रुख को.....

सवाल : सवाल : मिस खादी इंडिया में पार्टिसिपेट करके कैसा लग रहा है? 

जवाब : मुझे मिस इंडिया खादी में पार्टिसिपेट करके बहुत अच्छा फील हो रहा है साथ ही में एक जिम्मेदारी का अभी अहसास होता है कि मै  माडलिंग के बेस पर सिर्फ एक आइकन बनकर नहीं रह जाऊँगी बल्कि मैं किसी एक परपज के साथ सहभागिता करुँगी. ये मेरे लिए एक तरह से गर्व की बात है. 

सवाल : फैशन की मौजूदा दौर में खादी के कपड़ों का कितना स्कोप देखती है आप ? 

जवाब : बात अगर खादी के कपड़ों का स्कोप की जाये तो वर्तमान में इसका स्कोप इतना ज्यादा नहीं है पर हाँ जिस तरह संयुक्त रूप से खा सकरके जो खादी की जगह-जगह बनायीं गयी समितियां है उनका प्रयास वो धीरे धीरे रंग जरुर ला रहा है पर अभी और मेहनत की जरुरत है.

 
सवाल : खादी के कपड़ो को प्रमोट आप किस तरह कर रही है ? 

जवाब : मैं वैसे भी टेक्सटाइल डिजाइनर स्टूडेंट हूँ और मैं मोटिवेशन लेती हूँ उन डिजाईनर्स से जिन्होंने अपने काम में इनको आगे बढाया है. मैं खुद भी ऐसी जगह में प्रतिभाग लेती हूँ जिनमे मुझे हैण्ड वीविंग करनी पड़े जितना हम हाथ से वीविंग करते है. इससे ये महसूस होता है कि ये काम कितना मेहनत वाला है, कितना कला की जरुरत है, कितना ध्यान की जरुरत है. वैसे भी जिस चीज में आपकी जीतोड़ मेहनत लगे वो अपने आप में ही बेहद खास होती है. 

सवाल :आपकी समझ मे खादी के कपड़ों व अन्य कपड़ों में क्या बेसिक फर्क है ? 
जवाब : खादी में कपड़ों में एक अंतर ये है कि इसकी जो परत होती है वो थोड़ी खुरदुरी होती है इसके साथ ही खादी में और भी परिवर्तन देखने को मिलते है. इसके साथ ही इसकी जो सबसे ख़ास बात है वो ये हैं कि गर्म में ठण्ड का अहसास और ठण्ड में गर्म का अहसास कराता है.


सवाल : आज मिस इंडिया खादी 200से अधिक यूनिवर्सिटी में  और 500 डिजाइनर्स के साथ काम कर चुका है इसका कितना फायदा हुआ खादी और विलेज इंडस्ट्री को?

जवाब : खादी के कपड़ों पर मौजदा दौर में काफी काम देखने को मिल रहा है. इसमें बहुत सारे डिजाईनर्स है जो इसमें काम ले रहे है, नए नए डिजाईनर्स भी इसमें आ रहे है और इसमें एक अंतर ये भी है कि ये अब एक ट्रेंड बनने जा रहा है जिसकी वजह से लोगों में जागरूकता बढ़ रही है. अब ये कोई हमारा इतिहास नहीं रह गया है बल्कि ये हमारे वर्तमान का हिस्सा बन गया है और सबसे अच्छी बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सबको जागरूक करने कि एक पहल की है तो हम ये देख सकते है कि लोग अपनी भारतीय कला को आगे बढ़ाने जिम्मेदारी खुद ले रहे हैं. 





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