खादी हमारे देश का कपडा है इसे पहनना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है : आकृति भार्गव
अगर इंडिया में ही खादी के फैशनेबल कपडें बनेगें तो हम इंडिया के ही कपडें पहनेगे क्योकि मेरी समझ में खादी के कपड़ों और विदेशी कपड़ों में कोई खास अंतर है नहीं.


पायनियर एलायंस की मुहीम ‘अपना देश, अपना खादी’ में आज मिलिए आकृति भार्गव से. जो हाल ही में मिस इंडिया खादी फैशन शो में, उत्तराखंड की तरफ ‘मिस खादी उत्तराखंड’ बनी है. पेश है खादी के कपड़ों पर उनसे हुई बात-चीत का ब्यौरा 



सवाल : खादी के कपड़ो को प्रमोट  आप किस तरह कर रही है ?
 
जवाब : खादी के कपड़ों को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करने के लिए सबसे पहले तो ये जरुरी है कि हम उन्हें खुद पहने क्योकि अगर हम सोसायटी में कोई चेंज लाना चाहते है तो उसकी शुरुवात हमे खुद से करनी होगी. तो खादी के कपड़ों को प्रमोट करने का पहला स्टेप यही होगा कि उसे हम खुद पहने, अपने परिवारवालों को पहनने के लिए मोटिवेट करें क्योकि फैशन ट्रेंड जब शुरू होता है तो वो सिर्फ एक इंसान से शुरू होता है और फिर वो धीरे धीरे बढ़ता जाता है इसके अलावा हम जहाँ भी जाये वहां खादी के कपड़ों की चर्चा करें और लोगो को बताये कि ये मेड इन इंडिया है और इसे भारत में ही बनाया जाता है. इसलिए आप इंडियन है तो आप इंडियन कपड़ों को प्रमोट करें.

सवाल :आपकी समझ मे खादी के कपड़ों व अन्य कपड़ों में क्या बेसिक फर्क है ? 

उत्तर : मेरी समझ में तो सिर्फ इतना सा फर्क है कि जो खादी के कपडें है वो इंडिया में बनाये जाते है और जो दूसरे कपडें है उनका कच्चा माल इंडिया से ही बाहर भेजा जाता है और फिर उसे प्रोसेस करने के बाद इंडिया में फिर से सप्लाई कर दिया जाता है और उसे ज्यादा महंगे रेट पर बेचा जाता है जो की बिलकुल गलत है क्योकि जब वो ऐसा करते है तो हम भी महंगे कपडें खरीदते है. अगर इंडिया में ही खादी के फैशनेबल कपडें बनेगें तो हम इंडिया के ही कपडें पहनेगे क्योकि मेरी समझ में खादी के कपड़ों और विदेशी कपड़ों में कोई खास अंतर है नहीं.

 सवाल : क्या सिर्फ खादी के कपड़ें आज दौर में बिजनेस का माध्यम बन सकते है? 

 उत्तर : बिलकुल बन सकते है छोटा से छोटा आईडिया में भी आपको सफलता की बुलंदियों तक पंहुचा सकता है बशर्ते आप उसके के लिए डेडिकेटेड हो. अगर हम सिर्फ खादी के कपड़ों के बिजनेस पर ही डेडिकेटेड होकर अपने कदम बढ़ाएंगे तो निश्चित तौर पर हम सफलता हासिल करेंगे.

सवाल : खादी के कपड़ों पर प्रधानमंत्री के समर्थन पर आप क्या कहना चाहेंगी ?

जवाब : मुझे लगता है कि बहुत ही अच्छा कदम उठाया है हमारे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने. क्योकि पहले खादी के कपडें सिर्फ हल्की फुलकी चर्चाओं में ही लोगों की जुबान पर आते थे, कोई खुलकर इस पर बोल्ड कदम नहीं उठाता था, पर प्रधानमंत्री ने बोल्ड कदम उठाया, बताया लोगों को कि अगर आप मेक इन इंडिया ही पहनेगें तो उसका आर्थिक तौर पर फ़ायदा सीधा-सीधा इंडिया को होगा. इसलिए मैं PM के इस कदम से बहुत प्रभावित हूँ और और इसको मेरा पूरा सपोर्ट है.



सवाल : आज मिस इंडिया खादी 200से अधिक यूनिवर्सिटी में  और 500 डिजाइनर्स के साथ काम कर चुका है इसका कितना फायदा हुआ खादी और विलेज इंडस्ट्री को?

 उत्तर : देखिये फ़ायदा कितना हुआ इसका तो कोई सही आकड़ा मेरे पास नहीं है पर हाँ फायदें बहुत हुए है क्योकि अब जो नये फैशन डिजाईनर्स आये है वो अब खादी में ज्यादा इंटरेस्ट ले रहे है इस वजह से वो भारत सरकार से तो जुड़ ही रहे है साथ ही उन्हें एक प्लेटफार्म मिल रहा है अपने कपडें शोकेस करने का. नार्मली जो डिजाईनर्स होते है वो संघर्ष करते रहते है किसी रैंपशो में अपने कपडे शोकेस करने के लिए. इस खादी के प्लेटफार्म पर उन्हें इतना बड़ा मौका मिल रहा है कि कड़ी के कपडें डिज़ाइन करेंगे, माडल्स उन्हें पहनकर मिस इंडिया खादी के प्लेटफार्म पर वाक करेंगी जो कि मेरे ख्याल से हर डिजाइनर के लिए एक बड़ा मौका है.



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