गाँधी जी के फार्मूले की तर्ज पर PM मोदी का ‘खादी फार नेशन, खादी फार फैशन’ स्लोगन : गुरलीन
जो ब्रिटिश कम्पनियां हमारे कपडें के बाजार पर अपना कब्ज़ा जमाये उन्हें भागना पड़ेगा.


पायनियर एलायंस की मुहीम ‘अपना देश, अपना खादी’ में आज मिलिए गुरलीन से. जो हाल ही में मिस इंडिया खादी फैशन शो में, हिमांचल प्रदेश की तरफ ‘मिस खादी हिमांचल प्रदेश’ बनी है. पेश है खादी के कपड़ों पर उनसे हुई बात-चीत का ब्यौरा

सवाल : मिस खादी इंडिया में पार्टिसिपेट करके कैसा लग रहा है?
 
जवाब : सबसे पहले तो मैं मिस इंडिया खादी फाउन्डरेशन को थैंक्स कहना चाहती हूँ क्योकि उन्होंने मुझे ये मौका दिया है एज ए फ्रेशर कम्पीटीशन में भाग लेने का, ताकि मैं अपने आप को माडलिंग फील्ड में प्रूफ कर सकूँ और दूसरी बात ये है कि उन्होंने मुझे मौका दिया है स्वदेशी कपडें खादी को प्रमोट करने के लिए. तो एक तरह से मुझे मौका मिल रहा है देश के लिए कुछ करने का, तो मैं बहुत खुश हूँ मिस खादी इंडिया में पार्टिसिपेट करके.



सवाल : खादी के कपड़ो को प्रमोट  आप किस तरह कर रही है ? 

जवाब : यहाँ जब मिस खादी इंडिया का स्टेट फिनाले हुआ था उसके बाद एक और फैशन शो हुआ था जो खादी पर ही था जिसमे 4-5 लडकियों ने पार्टिसिपेट किया था वहां भी मैंने खादी के कपडें पहने थे उसके बाद चंडीगढ़ सेक्टर 34 में कुछ दिन पहले एक स्वदेशी मेला लगा था वहां खादी पर एक टॉक हुआ था जिसमे चंडीगढ़ की मेयर भी आई हुई थी. उस टॉक असर ये हुआ कि चंडीगढ़ की मेयर ने खुद मुझसे आकर कहा था कि हम लोग चाहते है कि आप खादी के कपडें खुद डिजाइन करो और जो खादी के कपडें आप लोगों ने फैशन शोज में पहने है वो कहाँ मिल सकते है. लोगों ने वहां मुझसे मेरा नंबर लिया था ये जानने के लिए की खादी के कपडें कहाँ मिलेंगे. तो एक तरह से आप कह सकते है कि खादी के कपड़ों को प्रमोट करने के लिए मैं खुद खादी के कपड़ों को पहन रही हूँ.

सवाल : कोई ऐसा कॉम्प्लिमेंट/अनुभव जो मिस खादी इंडिया में पार्टिसिपेट करने के बाद आपके लिए सबसे ज्यादा रोचक रहा? 

जवाब : सबसे बड़ा कम्प्लिमेंट यही है कि मैं अपने स्टेट से मिस इंडिया खादी बनी. अगर बात कंपीटिशन के बाद की करें तो जब हमारा स्टेट फ़ाइनल के लिए सलेक्शन हुआ था तब वहां मौजूद जजों ने कहा था कि हमे आपकी डेडिकेशन बहुत पसंद आयी जो मेरे लिए बहुत बड़ा कम्प्लिमेंट था.

सवाल : खादी के कपड़ों पर प्रधानमंत्री के समर्थन पर आप क्या चाहेंगी ?

जवाब : देखिये ! गांधी जी भी अपने समय में अंग्रेजों को भगाने के लिए खादी का उपयोग किया था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सेम फार्मूला यूज कर रहे है, खादी के कपड़ों के उपयोग पर बल देकर, क्योकि जब खादी के कपड़ों का प्रयोग बढेगा तो जो ब्रिटिश कम्पनियां हमारे कपडें के बाजार पर अपना कब्ज़ा जमाये उन्हें भागना पड़ेगा. तो एक से तरह से मैं कह सकती हूँ कि प्रधानमंत्री का ये कदम बहुत ही सरहनीय है और इसमें मैं पूरी तरह से उनके साथ हूँ.

सवाल: क्या आपको लगता है कि पीएम के खादी फार नेशन के आने के बाद फैशन में कुछ परिवर्तन हुआ है ?

जवाब : जी हाँ बिलकुल परिवर्तन हुआ है. मैंने अभी कुछ दिन पहले टाइम्स आफ इंडिया में एक आर्टिकल पढ़ा था जिसमे बताया गया था कि खादी के कपड़ों की सेल्स पिछले साल की तुलना में 33 प्रतिशत तक बढ़ गयी है और एक सर्वें में ये भी पता चला है कि लोग अब खादी के कपडें पहनना चाहते है और जब मैं स्वदेशी मेला में गयी थी तो मैंने भी खादी ही पहना था जिसके बाद सब लोगों ने मुझसे यही बोला था कि हमे भी खादी के कपडें पहनना हैं, लोगों ने वहां मेरे साथ फोटोज भी खिचाई थी और वो बहुत प्रभावित थे कि खादी के कपडें भी इतना सुन्दर लुक दे सकते हैं तो प्रधानमंत्री जी का स्लोगन है कि खादी फार नेशन, खादी फार फैशन, सच में लोगों को प्रमोट हो रहा है. लोग देख रहे है कि खादी के कपडें भी पहनने में सुन्दर व स्टायलिश हो सकते है.



सवाल : आज मिस इंडिया खादी 200 से अधिक यूनिवर्सिटी में  और 500 डिजाइनर्स के साथ काम कर चुका है इसका कितना फायदा हुआ खादी और विलेज इंडस्ट्री को?
जवाब : इसका सबसे ज्यादा फायदा हमारे बुनकर भाइयों को हुआ है क्योकि खादी के कपडें हम हाथ से बुनते हैं और अब जब खादी के कपड़ों की डिमांड बढ़ रही है तो उन्हें भी रोजगार मिल रहा है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति सुधर रही है और जाहिर से बात जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी तभी देश भी तरक्की करेगा. और दूसरी बात ये है कि अभी जितना भी खादी का कपडा बनता है उसे 80 प्रतिशत तक महिलाएं बुनती है तो खादी के मजबूत होने से  वीमेन भी मजबूत हो रही है जहाँ तक बात डिज़ाइनर्स की है तो डिज़ाइनर्स के साथ मिलकर हम लोगों ने खादी को उसके फार्मल लुक से ले जाकर एक खूबसुरत व फैशनेबल लुक दे दिया है जो आज की जनरेशन के हिसाब से हैं.

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