वो गायक जिसने महात्मा गांधी के भजन को दी थी अपनी आवाज़!
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भूपेन हजारिका एक ऐसे कलाकार थे, जिनकी कला और आवाज सिर्फ फिल्मी दुनिया के लिए ही नहीं थी, बल्कि वो अपने गीतों, संगीत और कविताओं से समाज के उस हिस्से की कहानी भी कहते थे जिसे अक्सर भुला दिया जाता है. भूपेन की मृत्यु 5 नवंबर 2011 को 85 साल की उम्र में हुई थी लेकिन हिंदी, बंगाली और असमी भाषा में गाये गए उनके गीत, उनकी कविताएं और उनके द्वारा तैयार किए गए संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिल में हूम हूम करके बस जाते हैं.

फिल्म 'गांधी टू हिटलर' में महात्मा गांधी के भजन 'वैष्णव जन' में अपनी आवाज देने वाले हजारिका को दक्षिण एशिया के सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता है. उन्होंने न सिर्फ गीत लिखे बल्कि कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण समेत अनेक क्षेत्रों में काम किया.

भूपेन ने असम और पूर्वोत्तर को एक साथ लाने के लिए नदियों से जुड़े कई गाने, सांस्कृतिक चीज़ें लेकर आए. इन सबके चलते उन्हें ‘बार्ड ऑफ लोइत’ (लोइत का चारण) भी कहा गया. लोइत असम में ब्रह्मपुत्र को कहते हैं. अमेरिका में रहने के दौरान हजारिका जाने-माने अश्वेत गायक पॉल रोबसन के संपर्क में आए, जिनके गाने ओल्ड मैन रिवर को उन्होंने हिंदी में 'ओ गंगा बहती हो' का रूप दिया.

ब्रह्मपुत्र के कवि भूपेन हजारिका को 1992 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया. वहीं 2001 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. हजारिका देश के ऐसे विलक्षण कलाकार थे, जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते भी थे.

भूपेन हजारिका की तुलना अमेरिका के महान गीतकार बॉब डिलन से की जा सकती है जो दुनिया के पहले ऐसे गीतकार है जिन्हें उनके काम के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. हजारिका और डिलन दोनों ही मूलत: गायक और गीतकार हैं, डिलन ने अपने कविता रूपी गीतों से अमेरिकी समाज को नई दशा और दिशा दी तो भूपेन ने भी असमी, बंगाली और हिंदी भाषा में अपने गीतों के जरिए एेसा ही किया. दोनों ने ही अपने करियर की शुरुआत क्षेत्रीय संगीत से की थी.

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