खेद है कि मैंने ज्यादा महिला निर्देशकों के साथ काम नहीं किया : दीया
खेद है कि मैंने ज्यादा महिला निर्देशकों के साथ काम नहीं किया : दीया


नई दिल्ली। अभिनेत्री दीया मिर्जा के लिए, जो एक फिल्म निर्माता भी हैं, यह सोचने वाली बात है कि 15 सालों से ज्यादा के अपने करियर में उन्होंने केवल दो बार महिला निर्देशकों के साथ काम किया है।

दीया ने बताया, ‘‘यह खेदजनक है कि 15 सालों से ज्यादा के अपने करियर में महिला निर्देशकों के साथ काम के ज्यादा मौके मुझे नहीं मिले...ऐसा केवल एक या दो बार ही हुआ है। ऐसा नहीं है कि मैंने जानबूझकर महिला निर्देशकों के साथ काम नहीं किया। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ सालों पहले तक कम ही महिलाएं निर्देशक की कुर्सी पर होती थीं।’’

दीया ने 2007 में रीमा काटगी निर्देशित ‘हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ में काम किया था। और उसके कई साल बाद, अब वह सोनम नायर के निर्देशन में वेबसीरीज ‘काफिर’ में काम करने जा रही हैं।

दीया मानती हैं कि इतने सालों में फिल्म जगत में महिलाओं के लिए स्थिति में काफी बदलाव आया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी जगह हासिल करने और अपनी आवाज उठाने वाली महिलाओं की बहुत बड़ी समर्थक हूं क्योंकि मैं मानती हूं कि उनके पास कहने के लिए कुछ जरूरी बातें और साझा करने के लिए कहानियां होती हैं। इसलिए जब भी मैं महिलाओं को अपने बल पर सफल होते देखती हूं, मैं सबसे मुखर आवाज में उनकी प्रशंसा करके अपनी खुशी जाहिर करती हूं।’’

निर्देशन के क्षेत्र में हाथ आजमाने के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘एक दिन मैं जरूर निर्देशन करूंगी।’’

दीया निर्माता के तौर पर डिजिटल मीडियम में भी कदम रख रही हैं। उन्होंने और उनके पति साहिल संघा ने अपने बैनर बॉर्न फ्री एंटरटेनमेंट के तहत एप्लॉज एंटरटेनमेंट के साथ मिलकर वेब शो ‘माइंड द मल्होत्राज’ का निर्माण किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘निर्माता के तौर पर हमारे अनुभव ने हमें एक ही बात सिखाई है - कहानी को वह सब दो जिसकी वह हकदार है और उसे जितना भी बजट चाहिए। आपकी टीम आपसे जितना प्यार चाहती है, उन्हें उससे ज्यादा प्यार दो और फिर आपके पास एक ऐसी टीम होगी जो खुश होगी और हमेशा अच्छा काम देगी।’’

वेब शो से पहले दीया ‘लव ब्रेकअप्स’ और ‘बॉबी जासूस’ जैसी फिल्मों का भी निर्माण कर चुकी हैं।

दीया ने 2000 में जब मिस एशिया पैसिफिक टाइटल जीता था तब वह एक किशोरी थीं और बाद में फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ से उन्हें लोकप्रियता मिली। 

वह परोपकार के कामों में भी योगदान देती हैं। 2017 से पर्यावरण के लिए यूएन गुडविल एंबेसडर के रूप में वह पर्यावरण के लिए काफी प्रचार कर चुकी हैं।

(आईएएनएस)

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