सरसों का तेल ठंड के मौसम में नवजात की मालिश करने के लिए भी बेस्ट है।
बादाम के तेल से करें मालिश


सर्दियों के मौसम में जितने फायदे होते हैं, उतने ही नुकसान भी होते हैं। नुकसान से हमारा अभिप्राय गंभीर रहने की ओर इशारा करना है। नवजात शिशु बहुत मासूम और नाजुक होते हैं। ऐसे में उनकी देखभाल भी हमें उतनी ही सावधानी से करने की जरूरत रहती है। शिशु को नहलाने से पहले उसकी तेल से मालिश करना भारत में किसी परंपरा से कम नहीं है। लेकिन मालिश को लेकर सवाल ये उठता है कि क्या हर मौसम में एक ही तरह के तेल से शिशु की मालिश की जा सकती है? जी नहीं, आपको अपने शिशु की मालिश के लिए मौसम के हिसाब से तेल का चुनाव करना होता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि सर्दियों के मौसम में शिशु की किस तेल से मालिश करनी चाहिए।

सरसों के तेल के फायदे हम आज नहीं सुन रहे हैं। बल्कि हमारी दादी-नानी बचपन से ही इस तेल को इस्तेमाल करने के गीत गाती आई हैं। सरसों का तेल ठंड के मौसम में नवजात की मालिश करने के लिए भी बेस्ट है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये शरीर को गर्मी प्रदान करता है। देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में सरसों के तेल को मालिश के लिये लहसुन और मेथी बीज के साथ गरम किया जाता है। दरअसल लहसुन में एंटीवायरल और जीवाणुरोधी गुण होते हैं, और माना जाता है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है।
वहीं, मेथी बीज शरीर को आराम देने के लिए जाना जाता है। वहीं कुछ जगहों पर सरसों के तेल को मसाज से पहले अजवाइन डालकर गर्म किया जाता है। यदि आप इसकी तीखी गंध की वजह से सरसों के तेल का उपयोग करना पसंद नहीं करते हैं, तो आप विकल्प के तौर पर बादाम या जैतून का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं। 

देसी घी खाने के लिए सबसे पौष्टिक कहा जाता है। लेकिन अगर बच्चों की मालिश के लिहाज से इसकी बात करें तो इसे लगभग नजरअंदाज करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि घी काफी चिपचिपा होता है और बच्चे के पोर्स (pores) को बंद कर सकता है। इसके अलावा अगर मलाई की बात करें तो इनसे भी शिशु की मसाज करने से बचना चाहिए। ये बच्चे की त्वचा पर चकत्ते या जलन पैदा कर सकते हैं।




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