मोटापा यानी बीमारी का घर
सूजन का आना भी याद्दाश्त को कमजोर करने में एक अहम भूमिका निभाता है


कैंब्रिज : अभी तक आपने यही पढ़ा और सुना होगा कि मोटापा यानी बीमारी का घर. आमतौर पर धारणा है कि मोटे व्यक्ति में बीमारियां होने की खतरा ज्यादा होता है. कई शोध से भी सामने आ चुका है कि मोटे लोगों में उच्च रक्तचाप और दिल से संबंधी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है. लेकिन अब नए शोध से पता चला है कि मोटापे से न केवल इंसान आलसी हो जाता है, बल्कि उसकी याद रखने की क्षमता में भी कमी आती है. वैज्ञनिकों ने शोध के आधार पर यह जानकारी हासिल की कि अल्जाइमर बीमारी के लिए मोटापा सबसे बड़ा कारण है.

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लूसी चेक के मुताबिक, उनकी टीम ने हाल ही में ट्रेजर हंट नाम की प्रतियोगिता का आयोजन किया. इसमें हर उम्र के लोगों को शामिल किया गया और कंप्यूटर की स्क्रीन पर अलग-अलग जगह पर कुछ चीजें छिपाने को कहा गया. बाद में इससे जुड़े सवाल पूछे गए. जिन प्रतिभागियों का बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) ज्यादा था, उनकी याद्दाश्त ज्यादा कमजोर थी.

अमेरिका की एरिजोना यूनिवर्सिटी के एक मनोवैज्ञानिक ने कुछ साल पहले करीब 20 हजार लोगों की याद्दाश्त, बीएमआई और सी-रिएक्टिव प्रोटीन के सैंपल लिए थे. इस शोध में पाया गया था कि याद्दाश्त का ताल्लुक बॉडी मास इंडेक्स से है. साथ ही इनफ्लेमेटरी प्रोटीन भी बहुत हद तक इसके लिए जिम्मेदार हैं. हमें भूख तब लगती है, जब हमारा दिमाग हमें खाना खाने का हुक्म देता है.

मोटापा आने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर और इंसुलिन की समस्या बढ़ जाती है. इसकी वजह से खाने की आदतों में भी फर्क पड़ता है. इससे भी दिमाग पर असर होता है. इंसुलिन एक अहम न्यूरोट्रांसमीटर है. इसका असर नई चीजें सीखने और याद रखने की क्षमता पर भी पड़ता है. सूजन का आना भी याद्दाश्त को कमजोर करने में एक अहम भूमिका निभाता है.




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