हर मर्ज की दवा...योगा
हर मर्ज की दवा...योगा


योगा में हर मर्ज की दवा। नियमित रूप से व्यायाम करने से ना सिर्फ तन तरोताजा बना रहता है, बल्कि पूरे शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है और साथ ही रक्त संचार भी तेज होता है। इससे त्वचा में निखार आता है। इसका सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सुंदरता पर भी गहारा प्रभाव पडता है। व्यायाम का अर्थ है सम्पूर्ण शरीर या शरीर के किसी अंग विशेष को एक समान लय में कुछ निश्चित समय या निश्चित अनुपात में गति देना, मांसपेशियो, हड्डियों एवं रक्त परिवहन को सुषुप्तावस्था से जाग्रत करना, उत्तेजित करना, उनकी कार्यप्रणाली में गति प्रदान करना । हर उम्र के व्यक्ति के लिए नियमित हल्के-फुल्के व्यायाम उचित हैं। जोश व उतावली में अनियमित और ज्यादा व्यायाम ना करें। वृद्ध व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं, हृदय रोगी भी डॉक्टर की सलाह लेकर कुछ व्यायाम ऐसा कर सकते हैं।

व्यायाम करते समय कपडे ढीले होने चाहिए। हवादार जगह में ही व्यायाम करें। बिना रूके एक के बाद एक व्यायाम करते रहना चाहिए। इससे रक्त संचालन सुचारू होता है और एक बात का खास ध्यान की ठंडे कमरे में व्यायाम नहीं करें। बल्कि किसी खुली जगह पर करें, जहां शरीर को ताजा हवा और धूप मिलें।

व्यायाम को 30-40 मिनट से अधिक नहीं करना चाहिए। स्वाभाविक तरीके से पूरा सांस लीजिए, व्यायाम करते समय जितनी हवा सम्भव हो, सांस के साथ भीतर लीजिए।

व्यायाम के बीच-बीम में ग्लूकोज मिला पानी पीते रहना चाहिए। व्यायाम करते समय अपना पूरा ध्यान उसी पर केंद्रित रखना चाहिए।

किसी व्यायाम की शुरूआत में उसे आठ बार से अधिक ना दोहराएं। धीरे-धीरे उसकी संख्या बढा दें। व्यायाम के तुरन्त बाद कोई ज्यूस जरूर लें।

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