एक्सर्साइज के फायदों को नष्ट कर रहा है वायु प्रदूषण
प्रदूषित ऑक्सफर्ड स्ट्रीट पर वॉक के बाद इन प्रतिभागियों के फेफड़ों की क्षमता में मामूली सुधार हुआ जबकी धमनियों की अकड़न और बिगड़ गई।


हाल ही में हुई दो अलग-अलग स्टडीज़ में इस बात का खुलासा हुआ है कि शहरों में बढ़ते प्रदूषण का गर्भ में पल रहे बच्चे और बुजुर्गों की सेहत पर सबसे बुरा असर पड़ता है। द लैंसेट जर्नल में छपी रिसर्च के मुताबिक, अगर कोई बुजुर्ग किसी भीड़-भाड़ वाले शहर में 2 घंटे की वॉक करते हैं तो इस दौरान वायु प्रदूषण की जितनी मात्रा वे अपने अंदर लेते हैं उससे उनकी धमनियों के अकड़ने और फेफड़ों के काम करने की प्रक्रिया दुर्बल होने की आशंका बढ़ जाती है। 

NHS की मानें तो बुजुर्गों में कार्डियोवैस्क्युलर फिटनेस बनाए रखने के लिए वॉकिंग करने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह एक लो इम्पैक्ट एक्सर्साइज है लेकिन इस स्टडी के मुताबिक शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से बुजुर्गों में इसका उल्टा प्रभाव पड़ रहा है यानी भारी प्रदूषण के बीच वॉक करने से स्वस्थ होने की बजाए बुजुर्गों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ रही है। 

इस स्टडी में 60 साल से ऊपर के करीब 119 लोगों पर टेस्ट किया गया। इसमें से 40 लोग पूरी तरह से स्वस्थ थे, 40 लोगों के फेफड़े की स्थिति चिकित्सीय रूप से स्थिर थी जबकी बाकी के 39 लोग हृदय रोग से पीड़ित थे लेकिन उनकी स्थिति स्थिर थी। इस दौरान प्रतिभागियों को यूके की सबसे प्रदूषित सड़क, ऑक्सफर्ड स्ट्रीट पर 2 घंटे के लिए वॉक करने को कहा गया। वॉक शुरू करने से पहले और वॉक करने के दौरान वायु प्रदूषण के लेवल को मापने के साथ ही हर प्रतिभागी के फेफड़ों की क्षमता और धमनियों के अकड़न को भी वॉक शुरू करने से पहले और बाद में मापा गया। 

प्रदूषित ऑक्सफर्ड स्ट्रीट पर वॉक के बाद इन प्रतिभागियों के फेफड़ों की क्षमता में मामूली सुधार हुआ जबकी धमनियों की अकड़न और बिगड़ गई। इम्पीरियल कॉलेज और लंदन में रेस्पिरेट्री मेडिसिन के प्रफेसर फैन चुंग जिन्होंने इस स्टडी का नेतृत्व किया था कहते हैं, 'जब हम वॉक करते हैं तो हमारा वायुमार्ग खुल जाता है और हमारी रक्त धमनियां खुल जाती हैं या फैलने लगती हैं और यह असर कुछ दिनों तक बरकरार रहता है। लेकिन जब यही वॉक हम किसी प्रदूषित जगह पर करते हैं तो शरीर पर पड़ने वाले ये सकारात्मक असर बेहद कम हो जाते हैं यानी आपने जो भी एक्सर्साइज या वॉकिंग की उसके फायदे समाप्त हो जाते हैं। जब हम किसी प्रदूषित इलाके में एक्सर्साइज करते हैं तो हम ज्यादा तेजी से सांस लेते हैं और इस तरह से प्रदूषित कण और जहरीली हवा हमारे फेफड़ों तक पहुंच जाती है।'

फैन चुंग आगे कहते हैं, 'हालांकि इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि बुजुर्गों को वॉक करना बंद कर देना चाहिए क्योंकि यह एक मात्र एक्सर्साइज है जो वे करते हैं। हमारा सुझाव यह है कि बढ़ती उम्र के लोगों और बुजुर्गों को शहर की भीड़भाड़ वाले इलाके की बजाए पार्कों में और ऐसी जगहों पर वॉक करना चाहिए जहां आसपास हरियाली हो।' 

BMJ में छपी एक दूसरी स्टडी में बताया गया कि प्रेग्नेंट महिलाएं अगर वायु प्रदूषण के हाई लेवल के संपर्क में रहती हैं तो जन्म के वक्त उनके बच्चे का वजन बेहद कम रहने की आशंका रहती है। हालांकि प्रफेसर केविन मेककॉनवे की मानें तो अब तक इस बात के पुख्ता प्रमाण मौजूद नहीं हैं कि जन्म के वक्त बच्चे का वजन कम होने के पीछे की वजह वायु प्रदूषण ही है। 

अधिक सेहत/एजुकेशन की खबरें