आयुर्वेद की मदद से किडनी की डायलिसिस से मिल सकता है छुटकारा
आयुर्वेद में ऐसी दवाएं मौजूद हैं जो न सिर्फ किडनी के मरीजों को डायलिसिस पर जाने से बचाती हैं बल्कि डायलिसिस से छुटकारा भी दिलाती हैं।


नई दिल्ली : किडनी खराब होने पर आमतौर पर मरीजों को डायलिसिस पर रखा जाता है जबकि आयुर्वेद में ऐसी दवाएं मौजूद हैं जो न सिर्फ किडनी के मरीजों को डायलिसिस पर जाने से बचाती हैं बल्कि डायलिसिस से छुटकारा भी दिलाती हैं। इंडो अमेरिकी जर्नल ऑफ फ़ार्मासूटिकल रिसर्च में प्रकाशित एक शोध पत्र में आयुर्वेद के ऐसे फ़ॉर्म्युलों का जिक्र किया गया है। आयुर्वेद के फॉर्म्युले पर 5 जड़ी-बूटियों से बनी दवा ‘नीरी केएफटी’ को लेकर पिछले दिनों यह शोध प्रकाशित हुआ है।

नीरी केएफटी का निर्माण गोखरू, वरुण, पत्थरपूरा, पाषाणभेद और पुनर्नवा से किया गया है। पुनर्नवा किडनी की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को फिर से पुनर्जीवित करने में कारगर है इसलिए आजकल इस आयुर्वेदिक फॉर्म्युले का इस्तेमाल बढ़ रहा है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग ने भी नीरी केएफटी के आयुर्वेदिक फ़ॉर्म्युले के प्रभाव का गहन अध्ययन किया है। उसके अनुसार नीरी केएफटी के इस्तेमाल से किडनी रोगियों में भारी तत्वों, मेटाबॉलिक बाई प्रॉडक्ट जैसे केटेनिन, यूरिया, प्रोटीन की मात्रा तेजी से नियंत्रित हो रही है। किडनी की कुल कार्यप्रणाली में तेजी से सुधार देखा गया है। जो किडनी कम क्षतिग्रस्त थी, उनमें भी सुधार देखा गया है। 

प्रफेसर के. एन. द्विवेद्वी ने कहा कि आयुर्वेद के फ़ॉर्म्युले किडनी की डायलिसिस का विकल्प हो सकते हैं। इस बीच पॉन्डिचेरी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने भी एक शोध में दावा किया है कि यदि किडनी की सेहत बढ़ाने वाले आयुर्वेदिक फ़ॉर्म्युलों का इस्तेमाल किया जाए तो काफी हद तक डायलिसिस से बचा जा सकता है। 

WHO के अनुसार 2025 तक भारत समेत विश्व में 18 फीसदी पुरुष और 21 फीसदी महिलाएं मोटापे की चपेट में होंगी। उन्हें तब सबसे ज्यादा खतरा किडनी रोग का होगा। इसलिए जीवनशैली में सुधार कर लोगों को इन खतरों से बचना होगा। किडनी की बीमारियों से बचाव के लिए WHO ने भी वैकल्पिक उपचार और खराब हो चुकी किडनी मरीजों को बचाने के लिए किडनी डोनेशन को बढ़ावा देने की पैरवी की है। 

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