Facebook बना रहा है माइंड रीडिंग मशीन, पढ़ेगा दिमाग
Facebook बना रहा है माइंड रीडिंग मशीन, पढ़ेगा दिमाग


सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक kमाइंड रीडिंग मशीनl तैयार कर रहा है, जो उपयोगकर्ता का दिमाग पढ़ने में मदद करेगा। फेसबुक के संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने हावर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉनथन जिटरेन को दिए साक्षात्कार में यह जानकारी दी है। जुकरबर्ग ने बताया कि फेसबुक एक 'ब्रेन-कम्प्यूटर इंटरफेस' पर शोध कर रहा है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि यह ऐसी तकनीक नहीं होगी, जिसका हर कोई इस्तेमाल कर पाए।  इस्तेमाल करने से पहले यूजर की सहमति दर्ज करानी होगी।  

ऑग्यूमेंटेड रियलिटी के लिए होगा उपयोगी 
निकट भविष्य में, ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस सिस्टम ऑग्यूमेंटेड रियलिटी एनवायरमेंट में मदगार साबित होगा। गौर करने वाली बात यह है कि इसके लिए कीबोर्ड, टचस्क्रीन या हैंड जेस्चर की जरूरत नहीं होगी। उपयोगकर्ता को सिर्फ उसके बारे में सोचना होगा और वह होने लगेगा। उदाहरण के तौर पर जैसे सामने रखी कुर्सी वहां से हट जाए तो ऑग्यूमेंटेड रियलिटी एनवायरमेंट में वह हट जाएगी। जुकरबर्ग के मुताबिक, यह कल्पना फेसबुक चलाने वालों को एआर दुनिया में बिना छुए मेन्यू चलाने और ऑब्जेक्ट को हटाने में मदद करेंगे। यहां तक कि उपयोगकर्ता बिना कुछ किए सिर्फ सोचकर टाइप कर सकेंगे। 

कैप जैसा होगा डिवाइस 
यह डिवाइस वर्चुअल हैंडसेट जैसा नहीं होगा जिसमें आंखे छिप जाती हैं। फेसबुक का यह सिस्टम एक कैप के समान होगा, जो रक्तचाप, दिमाग की क्रियाएं और उसकी सोच को कैद करेगा। जुकरबर्ग के मुताबिक, यह इंसान के लिए तकनीक को और बेहतर बनाने में मदद करेगा। जुकरबर्ग ने अपने साक्षात्कार में कहा कि 'वर्तमान समय में फोन या बाकी कम्प्यूटर सिस्टम जिस तरह काम करते हैं, उनके आधार पर एप और उनके टास्क निर्धारित होते हैं। उन्होंने कहा कि, यह वैसे काम नहीं करते जैसा हमारा दिमाग चाहता है या जैसा हम इनसे कराना चाहते हैं। यही एक वजह है कि तकनीक का कुशलत उपयोग के लिए एक नई तकनीक तैयार कर रहे हैं। एआर जैसे मामलों में यह डिवाइस सबकुछ करने की इजाजत देगा, जैसा आप सोचते हैं। 

डिवाइस पर कुछ प्रतिबंध भी रहेंगे
जुकरबर्ग ने इस सिस्टम पर कहा कि इसका विस्तार अत्याधिक नहीं किया जाएगा क्योंकि यह एक प्रतिबंधित डिवाइस हो सकता है। साल 2017 में जुकरबर्ग ने चैन जुकरबर्ग बायोहब के लिए पांच करोड़ डॉलर की राशि दी थी ताकि वह माइंड रीडिंग को शरीर में लगा कर परीक्षण कर सकें।  

2017 में पांच करोड़ डॉलर माइंड रीडिंग तकनीक के लिए जुकरबर्ग ने दिए थे
04 एचडी फिल्म के जितना डाटा इंसानी दिमाग एक मिनट में निकालता है मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक 

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