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अगर आप अपने बच्चे को बाहर नहीं खेलने देते है  तो हो जाइये सावधान
आज कल छोटे-छोटे बच्चे सारा दिन या तो टेलीविजन के सामने बैठे रहते है या तो मोबाइल पे वीडियो गेम देखते है


लखनऊ: आज कल छोटे-छोटे बच्चे सारा दिन या तो टेलीविजन के सामने बैठे रहते है या तो मोबाइल पे वीडियो गेम देखते है. ऐसे में उनके माता-पिता भी बच्चे पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते है. हालही में हुए शोध से इस बात का खुलासा हुआ है की जो बच्चे बाहर खुली हवा में नहीं खेलते है उनका पूरी तरह से मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पता है. 

आज के  समय में बच्चे पूरा पूरा दिन  कम्प्यूटर, टीवी और वीडियो गेम्स खेलने में निकाल देते हैं. ऐसे में वह न तो घर के बाहर दूसरे बच्चों के साथ घुल-मिल पाते हैं और न ही बाहर खेलना पसंद करते हैं. जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी काफी प्रभाव पड़ता है. हाल ही में एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि बच्चों को घर से स्कूल भेजने वाले परिजन सोच सकते हैं कि बच्चों को संगठित खेलों और शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त कर वे फिट रहते हैं, लेकिन युवाओं को इसकी और ज्यादा जरूरत होती है.

बच्चों के बाहर खेलने को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या इस बात को जानने को लेकर है कि आखिर कितनी सक्रियता संगठित जीवनशैली के लिए जरूरी है. परिजनों को अपने बच्चों को प्रतिदिन शारीरिक गतिविधियों के लिए और ज्यादा समय देना चाहिए. कबीरी ने कहा, "परिजन जानते हैं कि अगर वे अपने बच्चों को तेज सांस लेते हुए और पसीना छोड़ते हुए नहीं देखेंगे तो इसका मतलब वे पर्याप्त परिश्रम नहीं कर रहे हैं.

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