एक्जाम फीवर को भगाएंगी होम्योपैथी की मीठी गोलियां
अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों के धैर्य को बनाए रखने में उनकी सहायता करें।


लखनऊ : हर साल की तरह फिर आ गया परीक्षा का मौसम। उत्तर प्रदेश बोर्ड की हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट की परीक्षायें 16 मार्च से शुरू हो रही है। हर तरफ परीक्षा का ही शोर है। अभिाभावक परेशान है कि उनके बच्चों को कैसे अच्छे अंक मिले और छात्र परेशान हैं कि वह कैसे अच्छे अंक लाकर अपने माता-पिता के लाडले बने रहें और अपना भविष्य सुरक्षित बनाएं। परीक्षा का मौसम कभी-कभी छात्रों के लिए अनेक परेशानियां भी लेकर आता है। 

परीक्षा के डर से होने वाली परेशानियों को चिकित्सीय भाषा में एक्जा़म फीवर या फोबिया कहते है, इससे बच्चों में अनेक परेशानियां भी उत्पन्न हो सकती है जैसे- बच्चों का मन पढ़ाई के दौरान एकाग्र नहीं हो पाता है परीक्षा कक्ष काल कोठरी जैसा लगता है उसमें प्रवेश से पहले अजीब सी बेचैनी, घबराहट एवं सिहरन होने लगती है, पसीना आता है बार-बार पेशाब व दस्त की शिकायत हो जाती है, याद किया हुआ भूल जाता है, बार-बार आत्महत्या का विचार आता है, नींद उड़ जाती है, फेल हो जाने के भय सताता है। 

वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के सदस्य डॉ. अनुरूद्ध वर्मा ने बताया कि छात्रों की इन तमाम परेशानियों को दूर करने की ताकत है होम्योपैथी की मीठी-मीठी गोलियों में। उन्होंने बताया कि एक्जा़म फीवर एक मानसिक परेशानी है इससे लगभग 30 से 40 प्रतिशत छात्र प्रभावित होते हैं। परीक्षा में अच्छे अंकों से पास होने का दबाव इसकी सबसे बड़ी वजह है, ज्यादातर यह दबाव अभिभावकों द्वारा बनाया जाता है जिसके कारण बच्चे परीक्षा के दौरान एक कमरे में कैद हो कर रह जाते है। परीक्षा के दौरान खाने-पीने का रूटीन बदल जाता है। यह स्थिति ठीक नहीं है, परीक्षा के दौरान बच्चों को कमरे में कैद होने के बजाए, पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ा घूमना-फिरना तथा मनोरंजन भी जरूरी है। 

अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों के धैर्य को बनाए रखने में उनकी सहायता करें। छात्रों को किसी भी परीक्षा से डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि परीक्षा भी पढ़ाई का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में परीक्षा के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात दिलाने की अनेक कारगर औषधियां उपलब्ध है सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनका शरीर पर कोई कुप्रभाव भी नहीं पड़ता है। यदि परीक्षा में जाते समय डर लगे तो लाइकोपोडियम 30 एवं साइलीसिया 30 का प्रयोग किया जा सकता है। यदि परीक्षा के समय सिर दर्द बार-बार पेशाब लगने, दस्त एवं घबराहट की शिकायत हो तो जेल्सीमियम 30 एवं अर्जेंन्ट्रम नाइट्रिकम 30 का प्रयोग लाभदायक हो सकता है। 

डा0 वर्मा ने बताया कि परीक्षा की तारीख पास आने पर ज्यादातर बच्चों में अनिद्रा की शिकायत हो जाती है इन बच्चों के लिए नक्स वोमिका 30 फायदेमंद होती है। परीक्षा की पूरी तैयारी के बाद भी लगे कि कुछ याद नहीं है तो एनाकार्डिंयम 30 एवं कालीफंास 6 का प्रयोग किया जा सकता है। कुछ छात्र परीक्षा के दौरान ज्यादा तैयारी के लिए नींद न आने वाली दवाईयां ले लेते हैं जो स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है। सिर पर सवार परीक्षा ने छात्रों के लिए होली का रंग फीका कर दिया है, उन्होंने सलाह दी कि होली के दौरान छात्रों को रंग खेलने से परहेज करना चाहिए क्योंकि यदि रंग आँख मे पड गया तो आँख में दर्द एवं जलन हो सकती है जो छात्र की परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न कर सकती है। 

उन्होंने सलाह दी कि छात्रों को होली में तली-भूनी चीजे नहीं खाना चाहिये क्योंकि इससे आलस्य आता है तथा पेट खराब होने का डर बना रहता है। अभिभावकों को अपने बच्चों पर ज्यादा दबाव नहीं बनाने चाहिए क्यो कि इससे बच्चे तनाव में आ सकते है जिससे उन्हे परीक्षा के दौरान अनेक परेशानियों का सामना करना पडता है। छात्रों को परीक्षा से डरने की जरूरत नहीं है पूरी मेहनत और लगन के साथ खेल भावना से परीक्षा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी की दवाईयां आप के दिमाग से परीक्षा का भय निकाल देगी तथा परीक्षा के सफर में पूरा साथ निभाकर आप को सफलता दिलाने मेें आप का सहयोग करेगी परन्तु ध्यान रहे कि होम्योपैथिक दवाईयां केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की सलाह से ही लेनी चाहिए। 

अधिक सेहत/एजुकेशन की खबरें