ईरान तेल खरीदने के भारत के फैसले के बाद प्रतिबंधों पर 'छूट' पर विचार कर रहा US
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अमेरिकी सरकार के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि ट्रम्प प्रशासन सक्रिय रूप से प्रतिबंधों पर छूट पर विचार कर रहा है, जो अगले महीने ईरानी तेल के आयात को कम करने वाले देशों के लिए फिर से लागू होगा.

ट्रंप प्रशासन इस साल मई में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते से पीछे हट गया था. अब वह 4 नवंबर से ईरान के कच्चे तेल उपभोक्ताओं पर एकतरफा प्रतिबंधों को फिर से लागू कर रहा है. प्रतिबंधों का उद्देश्य तेहरान को सीरिया और इराक में संघर्षों में शामिल होने से रोकना और इसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए मजबूर करना है. ईरान का कहना है कि उसने साल 2015 के परमाणु समझौते का पालन किया है.

सरकार के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रशासन एसआरई छूट पर विचार करने की प्रक्रिया में है. ऐसा पहली बार है जब अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि प्रशासन छूट पर विचार कर रहा है. स्टेट सेक्रेटरी माइक पोम्पियो ने पिछले महीने भारत में कहा था कि प्रशासन छूट पर विचार करेगा.

बता दें कि रूस से S-400 मिसाइल डील के बाद अब भारत ने अमेरिका को दूसरा झटका दिया है. भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के साथ कारोबार जारी रखेगा. सरकारी रिफाइनर्स ने ईरान से 1.25 मिलियन टन क्रूड ऑयल खरीदने के लिए करार किया है. यही नहीं भारत ने अमेरिकी डॉलर में पेमेंट की जगह रुपये में कारोबार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाने की तैयारी कर ली है.

दरअसल, अमेरिका 4 नवंबर से ईरान से तेल खरीदने वाले देशों के लिए अपने प्रतिबंधों को पूरी तरह प्रभावकारी बना देगा. हालांकि, ईरान के खिलाफ प्रतिबंध अमेरिका का द्विपक्षीय मसला है, लेकिन अमेरिका इसमें पूरी दुनिया को खींच चुका है.

अमेरिका का साफ कहना है कि नवंबर के बाद अगर किसी देश ने ईरान के साथ बिजनेस जारी रखा, वो अमेरिका के साथ बिजनेस नहीं कर पाएगा. हालांकि, भारत ने ईरान के साथ बिजनेस जारी रखने का फैसला लिया है. ऐसे में रूस से S-400 डील के बाद यह एक तरह से भारत द्वारा अमेरिका को दिया गया दूसरा झटका होगा.

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