माल्या के प्रत्यर्पण पर मुहर लगाने वाले इस शख्स का पाकिस्तान से है खास नाता
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भगोड़े भारतीय कारोबारी विजय माल्या के ब्रिटेन से भारत को प्रत्यर्पण पर मुहर लगाने वाले ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जावेद का पाकिस्तान से एक खास कनेक्शन है. बेशक वो इंग्लैंड के जाने-माने राजनीतिक के रूप में जगह बना चुके हों, लेकिन उनकी असली जड़ें इस देश में नहीं बल्कि पाकिस्तान से हैं, जहां से कभी उनके पिता यहां आए थे. पिता ने लंदन में बस कंडक्टर की मामूली नौकरी से करियर शुरू किया था.

माल्या पर भारतीय बैंकों की 9300 करोड़ रुपए की लेनदारी है. बैंकों का धन चुकाए बगैर इंग्लैंड भाग जाने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है. हाल में माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर सबकी निगाहें ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जावेद पर टिकी हुई थीं. साजिद वो शख्स हैं, जिनकी जड़ें भारत और पाकिस्तान में हैं और उनके बहुत से रिश्तेदार अब भी यहां रहते हैं.

साजिद के पिता अब्दुल ग़नी साल 1960 में पाकिस्तान के एक छोटे से गांव से काम की तलाश में ब्रिटेन पहुंचे थे. लेकिन साजिद का परिवार उन सैकड़ों परिवारों में शामिल है, जिन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी को झेला था. उनके माता-पिता का जन्म भारत में ही हुआ था और विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान पहुंचा था.

साल 1960 में उनके पिता ने 17 साल की उम्र में पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन जाने का फ़ैसला किया था. भारत से पाकिस्तान जाने के बाद भी साजिद के पिता को वो देश बहुत रास नहीं आ रहा था. साजिद ने अंग्रेज़ी अख़बार 'द गार्डियन' से बात करते हुए बताया था कि जब उनके पिता ब्रिटेन पहुंचे थे तो उनकी जेब में मात्र एक पाउंड था.

49 वर्षीय साजिद का जन्म 1969 में ब्रिटेन के रोशडेल नामक कस्बे में हुआ था, यानी उनके पिता के इंग्लैंड पहुंचने के नौ साल बाद. उस समय उनके पिता काम को लेकर संघर्ष कर ही रहे थे. साजिद ने इंग्लैंड के एक अखबार इंवनिंग स्टैंडर्ड को इंटरव्यू में बताया था कि जब पिता रोशडेल में बसने आए तो वो वहां की कपड़े की मिल में काम करने लगे.

वो बहुत महत्वाकांक्षी थे. उन्होंने देखा कि बस ड्राइवरों की ज़्यादा कमाई होती है. लिहाजा उन्होंने रात में बस ड्राइवर का काम शुरू कर दिया. उनके दोस्तों के बीच उन्हें मिस्टर नाइट एंड डे कहकर पुकारा जाता था, क्योंकि वह पूरे टाइम काम में लगे रहते थे. जब उन्होंने ठीकठाक पैसे जमा कर लिये तो ब्रिस्टल में महिलाओं के इनरवीयर बेचने वाली एक दुकान खोली. इसी दुकान के ऊपर दो कमरों के घर में साजिद का पूरा परिवार रहता था.

अब्दुल ग़नी के पांच बेटों में एक साजिद जावेद का बचपन ब्रिस्टल में ही बीता. यहीं पर डाउनएंड स्कूल में उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई की. साल 2014 में डेली मेल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका स्कूल सख़्त था. साजिद पढ़ाई में अच्छे थे. उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर पढ़ाई के क्षेत्र में सफलताएं हासिल करनी शुरू कर दीं.

साजिद जावेद साल 2010 में पहली बार सांसद बने. 25 साल की उम्र में वह चेज़ मैनहट्टन बैंक के उपाध्यक्ष के पद तक पहुंचे. सांसद बनने से ठीक पहले वो डॉयच बैंक में प्रबंध निदेशक थे. एक मंत्री के रूप में उन्होंने अपना कार्यकाल वित्त मंत्रालय से शुरू किया.

साजिद ने अपनी बचपन की दोस्त लौरा किंग से 1997 में शादी रचाई. एक समर जॉब के सिलसिले में उनकी मुलाकात उनसे हुई थी. जावेद के चार बच्चे हैं. उनकी पत्नी लगातार चर्च जाती हैं. जावेद खुद को धार्मिक नहीं मानते. कई मुस्लिम समुदाय इसे लेकर उनकी आलोचना भी करते रहते हैं.

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