नेपाल अब चीन के  नक्शेकदम पर, अब दुनिया को भेजेगा विवादित नक्शा
नेपाल सरकार ने देश के नए राजनीतिक नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को शामिल किया है।


नई दिल्ली: नेपाल सरकार ने देश के नए राजनीतिक नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को शामिल किया है। इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक रविवार को नेपाली संसद में पेश किया गया। भारत ने नेपाल के इस कदम पर सख्त नाराजगी जताई है। नेपाल को कड़ा संदेश देने के लिए भारत अब इस मुद्दे पर नेपाल को चीन की ही चाल से घेरना चाहता है।

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भारत का मानना है कि नेपाल इस बात को नजरअंदाज कर रहा है कि भारत और चीन के बीच हुए समझौतों के मुताबिक लिपुलेख 1991 से बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा पर कारोबार का पॉइंट रहा है। नेपाल लिपुलेख पर अपना दावा कर रहा है। विभाग ने देश के भीतर वितरित किए जाने वाले नक्शे की 25,000 कॉपियां प्रिंट करा ली हैं. स्थानीय इकाइयों, प्रांतीय और अन्य सभी सार्वजनिक कार्यालयों में ये कॉपी मुफ्त में दी जाएंगी, जबकि जनता इसे 50 रुपये में खरीद सकती है.



भारत-चीन समझौता...

हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को सूत्रों ने बताया कि भारत नेपाल के समक्ष यह बात रखेगा कि नक्शे में बदलाव के उसके फैसले में भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को नजरअंदाज किया गया है। हैरानी की बात है कि नेपाल नें 1990 के दशक से इन समझौतों पर कभी आपत्ति नहीं जताई है।

20 मई को जारी किया था नक्शा...

बता दें कि नेपाल सरकार ने 20 मई को भारत के तीन हिस्सों को अपना बताते हुए नक्शा जारी किया था. विवादित नक्शे में भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को शामिल किया गया है. भारत इस विवादित नक्शे का विरोध करता रहा है. बावजूद इसके 13 जून को नेपाल की संसद में ये पास हो गया था.

नेपाल सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 15 मई को अपनी वार्षिक योजनाओं और नीतियों को पेश करते हुए नए नक्शे को जारी करने की बात कही थी. इस विवादित नक्शे के जारी होने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने ही देश में घिर गए थे. पार्टी के अंदर ही उनके खिलाफ उठने लगी थी. भारत विरोधी फैसलों के कारण उन्हें पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद से हटाने की बात चल रही थी.



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