रूस के साथ कथित संबंधों पर मुश्किल में ट्रंप?
डेमोक्रैटिक पार्टी और कुछ रिपब्लिकन सांसद इस विकल्प का इस्तेमाल करने को भी तैयार हैं।


वॉशिंगटन : राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के रूस के साथ कथित संबंधों से जुड़ा 'ट्रंप रिपोर्ट' तैयार करने वाले MI6 के पूर्व ब्रिटिश जासू क्रिस्टोफर स्टीले से अमेरिकी संसद की खुफिया समिति ने अपना बयान देने को कहा है। समिति ने क्रिस्टोफर से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच के सिलसिले में वह अपनी गवाही दें। क्रिस्टोफर के दोस्तों का कहना है कि वह शायद इस समय अमेरिका नहीं जाना चाहेंगे। अगर क्रिस्टोफर अमेरिका आकर संसदीय समिति के सामने पेश होने में असमर्थता जताते हैं, तो हो सकता है कि ब्रिटेन या फिर किसी अन्य तटस्थ देश में उनके साथ मुलाकात का इंतजाम किया जाए। डेमोक्रैटिक पार्टी और कुछ रिपब्लिकन सांसद इस विकल्प का इस्तेमाल करने को भी तैयार हैं।

'द इंडिपेंडेंट' की एक खबर के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और संसद की आर्म्ड सर्विसेज कमिटि के अध्यक्ष जॉन मकेन ने नवंबर 2016 में क्रिस्टोफर से इस मामले की फाइल लेने के लिए एक मध्यस्थ को लंदन भेजा था। बाद में इस फाइल को उन्होंने निजी तौर पर FBI के निदेशक जेम्स कॉमे के सुपुर्द किया। क्रिस्टोफर ने खुद भी इस जांच के दौरान कइ बार FBI के साथ संपर्क किया था।

राष्ट्रपति ट्रंप क्रिस्टोफर के दावों को खारिज करते हुए उनकी आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक, रूस के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर क्रिस्टोफर ने जो फाइल बनाई है, वह फर्जी है। ट्रंप ने कहा, 'एक नाकाम हो चुके जासूस ने यह काम किया है।' आरोप है कि रूस से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डेमोक्रैटिक उम्मीदवार हिलरी क्लिंटन को हराने के लिए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। आरोप है कि उसने हैकिंग की मदद से डेमोक्रैटिक पार्टी के कंप्यूटर्स और हिलरी के ईमेल्स से जानकारियां लीक कीं। आरोप यह है कि ट्रंप की टीम के कुछ सदस्य चुनाव के दौरान भी लगातार रूस के साथ संपर्क में थे। 

ट्रंप भले ही क्रिस्टोफर को 'नाकाम' बताएं, लेकिन असलियत में ब्रिटिश सुरक्षा और खुफिया विभाग के साथ-साथ अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों के बीच भी क्रिस्टोफर का काफी सम्मान है। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी पहले भी कुछ मामलों में उनके साथ मिलकर काम कर चुके हैं। इस हफ्ते सामने आई जानकारी से पता चला कि इस पूरे मामले में एक समय ऐसा भी आया, जब FBI ने ट्रंप और उनके सहयोगियों के खिलाफ मामले की जांच जारी रखने के लिए क्रिस्टोफर को पैसे देने की पेशकश की। यह डील तो आगे नहीं बढ़ पाई, लेकिन इसके बावजूद क्रिस्टोफर ने बिना पैसों के ही इस जांच का काम जारी रखा। उनका कहना है कि ट्रंप और उनके सहयोगियों के रूस के साथ संबंधों को लेकर वह जो जांच कर रहे थे, उसमें उनके सामने जो जानकारियां आ रही थीं, उसे लेकर वह काफी चिंतित थे।

सूत्रों के मुताबिक, संसदीय जांच समिति क्रिस्टोफर की गवाही के माध्यम से इस मामले की ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है। समिति अपने स्तर पर भी इस मामले की जांच कर रही है। यह जांच FBI की जांच से अलग और स्वतंत्र है। अमेरिकी संसदीय समिति के सामने पेश होकर गवाही देने के निवेदन पर क्रिस्टोफर की ओर से कोई प्रतिक्रिया अभी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि अभी आधिकारिक तौर पर यह प्रस्ताव उनके पास नहीं भेजा गया है। उनके दोस्तों का कहना है कि क्रिस्टोफर शायद संसदीय समिति के सामने अपनी जांच को लेकर गवाही देने को तैयार हो जाएंगे, लेकिन ऐसा तभी होगा जब उनके द्वारा रखी गई कुछ सुरक्षा संबंधी शर्तों को पूरा करने के लिए अमेरिका राजी हो जाए। हाल में हुए कुछ खुलासों से सामने आया है कि ट्रंप प्रशासन का रूस के साथ संपर्क हुआ। जानकारी के मुताबिक, अटॉर्नी जनरल जेफ सेशन्स राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अमेरिका में नियुक्त रूसी राजदूत के साथ संपर्क में थे। ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) लेफ्टिनंट जनरल माइकल फ्लिन को इसी तरह के आरोपों के कारण पिछले महीने इस्तीफा देना पड़ा था।

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