प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल कर संकट से निकल सकता है कतर
प्राकृतिक गैस की कतर से होने वाली आपूर्ति पर कई देश निर्भर हैं।


दुबई : प्राकृतिक गैस ने ही कतर को संपन्न बनाया है और इसी की मदद से यह खाड़ी देश मौजूदा राजनयिक संकट से बाहर आ सकता है। कतर दुनिया में तरल प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा निर्यातक है। प्राकृतिक गैस की कतर से होने वाली आपूर्ति पर कई देश निर्भर हैं। यानी यह प्राकृतिक संपदा ही कतर के लिए इस संकट की घड़ी में संकटमोचक का काम कर सकती है। आइये जानते हैं किस तरह प्राकृतिक गैस की मदद से कतर मौजूदा संकट से बाहर निकल सकता है...

कतर से होने वाली आपूर्ति ब्रिटेन में सर्दी के समय घरों को गर्म रखती है। इसी से एशियाई मार्केट को ईंधन मिलता है और कतर से संपर्क तोड़ने वाले खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात के इलेक्ट्रिकल ग्रिड को भी पावर यहीं से मिलता है।

पिछले हफ्ते राजनयिक विवाद शुरू होने के बाद से अब तक कतर ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई इन देशों को अबाधित जारी रखी है। अभी तक इसके दाम पर विवाद का कोई असर नहीं पड़ा है। अगर संकट लंबा खींचा तो कतर इसे एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए अन्य देशों को सप्लाई रोक सकता है। सप्लाई रुकने की स्थिति में जो देश कतर पर निर्भर हैं, वे देश इस छोटे राष्ट्र का पक्ष लेने पर मजबूर हो सकते हैं।

कतर का व्यापक पैमाने पर अध्ययन करने वाले राइस यूनिवर्सिटी के जेम्स ए.बेकर III इंस्टिट्यूट फॉर पब्लिक पॉलिसी के रिसर्च फेलो क्रिस्टीन कोट्स अलरिसेन ने बताया, 'अगर कतर गैस निर्यात को रोक देता है तो ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन में ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी और उनको कहीं और से ऊर्जा का बंदोबस्त करना पड़ेगा।'

कतर की आबादी करीब 22 लाख है, जिसमें यहां के नागरिक कुल संख्या का 10 फीसदी हैं। 1971 में यहां उत्तरी गैस फील्ड की खोज हुई और उसी साल से यह आत्मनिर्भर बन गया। इंजिनियरों को यहां गैस के विशाल भंडार का पता लगाने में बरसों लगे लेकिन उसके बाद यह रूस और ईरान के बाद दुनिया में गैस भंडार के मामले में तीसरे नंबर पर आ गया।

कतर ने 1997 में प्राकृतिक गैस की सप्लाई करनी उस समय शुरू की, जब बगावत के बाद कतर के राजकुमार हमाद बिन खलीफा अल सानी ने अपने पिता शेख खलीफा से गद्दी छीन ली। शेख हम्माद ने खाड़ी देशों के बीच कद्दावर उपस्थिति वाले सऊदी अरब से राजनयिक संबंध बनाने के लिए प्राकृतिक गैस से होने वाली कमाई का इस्तेमाल किया। कतर 2022 में फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी भी करने जा रहा है। तेल की कमाई से ही स्टेडियम बनेगा और इसकी राजधानी दोहा को विकसित किया जाएगा।

हालांकि कतर और सऊदी अरब सुन्नी इस्लाम की अति रुढिवादी परंपरा वहाबिजम पर अमल करता है लेकिन कतर सऊदी अरब के मुकाबले कुछ मामलों में उदार भी है। यहां महिलाओं को गाड़ी चलाने और विदेशियों को शराब पीने की अनुमति है। बीते समय में सऊदी अरब और बहरीन के साथ कतर का भूभाग पर कब्जे को लेकर विवाद हो चुका है। कतर में 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यूएस मिलिट्री के सेंट्रल कमांड का मुख्यालय यहीं है।

कतर बदला लेने के लिए समुद्र के नीचे से यूएई जाने वाली डॉल्फिन एनर्जी पाइपलाइन को बंद कर सकता है। इस पाइपलाइन से संयुक्त अरब अमीरात रोजाना 57 मिलियन क्युबिक मीटर्स प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है, जो यूएई की रोजाना की जरूरत का एक तिहाई है। उसमें से करीब 5.66 मिलियन क्युबिक मीटर्स ओमान जाता है। इस गैस की सप्लाई के बगैर दुबई और यूएई की राजधानी अबू धाबी में एयर कंडिशनर नहीं चल पाएंगे जो इस रेगिस्तानी साम्राज्य के लिए चिलचिलाती गर्मी से निजात पाने का उपाय है। गैस सप्लाई न होने की स्थिति में यहां खारे पानी को पीने योग्य पानी में बदलने का संयंत्र भी नहीं चल पाएगा।

ब्रिटेन की दरहम यूनिवर्सिटी में मिड्ल ईस्ट पॉलिटिक्स के प्रफेसर क्रिस्टोफर डेविडसन ने बताया, 'अगर कतर इस तरह के उपाय का सहारा लेगा तो दुबई की बिजली बंद हो जाएगी।'

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