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कौन थे चीन की सरकार को डराने वाले लियू शाओबो?
चीन के नागरिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रहे लियू शाओबो का गुरुरवार को निधन हो गया।


नई दिल्ली : चीन के नागरिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रहे लियू शाओबो का गुरुरवार को निधन हो गया। लियू कुछ लोगों के लिए हीरो थे, तो चीन की सरकार के लिए खलनायक। पेशे से लेखक, प्रफेसर, मानवाधिकार ऐक्टिविस्ट लोगों की नजरों में साल 1989 में आए थे। 

साल 1989 में ही टियाननमन स्क्वॉयर पर हुए खूनी नरसंहार के दौरान अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लियू प्रदर्शन में हिस्सा लेने वापस चीन आ गए थे। ऐसा कहा जाता है कि लियू ने उस नरसंहार में सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी। जिसके बाद वे लोकतंत्र समर्थकों के लिए हीरो बन गए थे। उस समय लोकतंत्र की मांग को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को चीनी सेना ने खदेड़ा था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे।

लियू का आंदोलन 1989 में ही खत्म नहीं हुआ। बल्कि उन्होंने हमेशा ही बड़े राजनीतिक सुधारों और चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को खत्म करने की मांग की। उनकी लोकतंत्र स्थापित करने की मांग को लेकर ही उन्हें चीन प्रशासन ने कई बार सालों तक जेल में ठूसा। टियाननमन नरसंहार के वक्त उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और साल 1991 में वे रिहा हुए।

रिहा होते ही लियू ने अपने ही साथ जेल गए अन्य लोगों की रिहाई के लिए अभियान चलाना शुरू कर दिया। इसके परिणामस्वरूप लियू को फिर गिरफ्तार कर के 3 साल तक लेबक कैंप में भेज दिया गया। जेल में रहने के दौरान ही 1996 में उन्होंने आर्टिस्ट लियू शिया से शादी की और साल 1999 में रिहा हुए।

साल 2008 में एक बार फिर लियू सरकार की नजरों में आ गए जब उन्होंने 'चार्टर 08' नाम से एक घोषणापत्र जारी किया। इस दस्तावेज में उन्होंने चीन की सरकार में बदलाव लाने और नए संविधान के निर्माण की मांग की थी। यह दस्तावेज प्रकाशित होने से कुछ दिन पहले ही लियू के घर पर छापा पड़ा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 

लियू को लंबे समय तक चीन से एक पार्टी की सत्ता को खत्म करने के लिए अहिंसक संघर्ष को लेकर साल 2010 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हालांकि, वह पुरस्कार लेने नहीं जा सके और इसकी वजह से नॉर्वे और चीन के बीच विवाद भी पैदा हो गया था। लियू की पत्नी को भी चीन ने नजरबंद कर के रखा है।

गिरफ्तारी के एक साल बाद लियू की कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई और साल 2009 में क्रिसमस के दिन उन्हें देश की सत्ता को खत्म करने के लिए लोगों को उकसाने के आरोप में 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई। हालांकि इस सजा का यूरोपियन यूनियन, अमेरिका और तमाम मानवाधिकार समूहों ने विरोध किया। 

इसी साल मई में लियू को लिवर कैंसर होने की बात पता चली। मई के ही आखिर में उन्हें जेल से परोल पर रिहा किया गया और शेनयांग के एक अस्पताल में इलाज कराने की मंजूरी मिली। ऐक्टिविस्ट्स ने चीन से लियू को रिहा करने की अपील की ताकि वे विदेश जाकर अपना बेहतर इलाज करा सकें लेकिन चीन के डॉक्टर्स ने कहा कि लियू यात्रा करने की हालत में नहीं हैं। लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद चीन ने जर्मनी और यूएस के एक-एक डॉक्टर को लियू के स्वास्थ्य की जांच के लिए बुलाया। इन डॉक्टर्स ने चीन के दावों को खारिज करते हुए लियू को यात्रा के लिए स्वस्थ बताया। चीनी प्रशासन के मुताबिक गुरुवार को शरीर के कई अंगों के एक साथ काम करना बंद कर देने की वजह से लियू की मौत हो गई।

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