भारत में मिस करने लायक कुछ भी नहीं: विजय माल्या
भारत सरकार ने उनको प्रत्यर्पित करने की कोशिशें तेज कर दी हैं।


सिल्वरस्टोन : भगोड़े भारतीय कारोबारी विजय माल्या ने कहा है कि भारत में मिस करने लायक कुछ भी नहीं है। माल्या ने यह बात उस वक्त कही, जब उनसे पूछा गया कि क्या वे भारत को मिस करते हैं? बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन लेकर न चुकाने के मामले में घिरने के बाद माल्या भारत से भागकर लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। भारत सरकार ने उनको प्रत्यर्पित करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना मामले में आज उनको सजा का ऐलान हो सकता है। कोर्ट ने माल्या को 10 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश का पालन न करने पर उन्हें अवमानना का दोषी करार दिया था। 

पिछले दिनों इंग्लैंड में हुए क्रिकेट मैच के दौरान भी माल्या वहां नजर आए थे। बुधवार को फॉर्म्युला वन के प्रमोशनल इवेंट में पहुंचे माल्या ने कहा, 'भारत में याद करने लायक कुछ भी नहीं है। मेरे परिवार के सदस्य या तो इंग्लैंड में रह रहे हैं या फिर अमेरिका में। भारत में कोई नहीं रहता। जहां तक मेरे सौतेले भाई-बहनों का सवाल है, वे सभी यूके के नागरिक हैं। तो परिवार के नजरिए से कुछ भी याद करने लायक नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। मैं तो खुश हूं कि मामला यूके कोर्ट में है, जहां पक्षपात नहीं होता। अब तो फैसले का इंतजार कर रहा हूं।' उन्होंने कहा कि वह लंदन का माहौल काफी पसंद कर रहे हैं। रोजाना मेहमानों से मिलते हैं और मजे करते हैं। 

बता दें कि पिछले दिनों ब्रिटेन की अदालत में उनके वकील ने भारतीय जेलों की खराब हालत की बात कहकर माल्या के प्रत्यर्पण का विरोध किया था। ब्रिटिश वकीलों के मुताबिक, माल्या के प्रत्यर्पण का मामला फरवरी 2018 से आगे नहीं जाएगा। इसमें ब्रिटिश हाई कोर्ट के कम-से-कम 6 महीने और ज्यादा-से-ज्यादा 1 साल के पीरियड को जोड़ा जा सकता है, जहां क्राउन कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई होगी। इतना ही वक्त या शायद इससे भी कम सुप्रीम कोर्ट उनके मामले पर फैसला लेने में लेगा। विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटिश कोर्ट में दो हफ्ते तक होने वाली सुनवाई 4 दिसंबर से शुरू हो जाएगी। वेस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट की अदालत को बताया गया कि भारत सरकार ने मुकदमे से जुड़े सारे साक्ष्य जमा करा दिए हैं और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने इनकी समीक्षा भी कर ली है। इसी जानकारी पर अदालत ने सुनवाई की तारीख तय कर दी। 

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