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ईवीएम-वीवीपैट मामले में विपक्ष के 21 दलों को सुप्रीम कोर्ट से झटका
VVPat case shock the Supreme Court




नई दिल्ली: इससे पहले सुप्रीम कोर्ट लोकसभा चुनाव में ईवीएम के साथ वीवीपैट की पर्चियों के औचक मिलान की संख्या बढ़ाने लिए 21 विपक्षी नेताओं की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया था। शीर्ष अदालत ने आठ अप्रैल को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि मतगणना के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ लगी वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की प्रक्रिया प्रति विधानसभा क्षेत्र एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र की जाए। इससे पूर्व शीर्ष अदालत ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 50 फीसदी पर्चियों का मिलान करने का विपक्षी नेताओं का आग्रह अस्वीकार कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया था। उन्होंने पीठ से कहा कि पुनर्विचार याचिका अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाए। पीठ ने सिंघवी का यह आग्रह स्वीकार करते हुए कहा कि पुनर्विचार याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई की जाएगी।

पुनर्विचार याचिका में क्या

पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि वीवीपैट पर्चियों के मिलान में सिर्फ दो प्रतिशत की वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी और इससे न्यायालय के आदेश से पहले की स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आएगा। इसलिए, याचिकाकर्ता मेरिट के आधार पर अपनी दलीलों में सफल रहे हों लेकिन उनकी यह सफलता उनकी शिकायत का समाधान नहीं करती है। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत की पहले की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा है कि उसने कहा था कि ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों में औचक मिलान की प्रक्रिया में 2 प्रतिशत की वृद्धि से चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने का मकसद पूरा नहीं होगा।

विपक्षी दलों की मांग

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में इन विपक्षी दलों के नेताओं ने पुनर्विचार याचिका में कहा है कि वीवीपैट पर्चियों के औचक मिलान के लिए एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर 5 मतदान केंद्र करना पर्याप्त नहीं है और इससे संतोषप्रद नतीजे नहीं मिलेंगें।

चुनाव आयोग की दलील

याचिका में निर्वाचन आयोग की इस दलील का विरोध किया गया है कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसी स्थिति में ईवीएम के साथ वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की संख्या को बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है।

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