मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में फैसला देने वाले जज रेड्‌डी ने इस्तीफा दिया
मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में फैसला देने वाले जज रेड्‌डी ने इस्तीफा दिया


हैदराबाद। मक्का मस्जिद बम धमाके मामले में फैसला देने वाले जज रविन्द्र रेड्‌डी ने इस्तीफा दे दिया है। स्पेशनल एनआईए कोर्ट के जज ने फैसला सुनाने के कुछ घंटों के बाद ही व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है। 

उन्होंने अपना इस्तीफा आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अपना त्यागपत्र भेजा है। रेड्‌डी ने 11 साल पुराने मामले में सोमवार को फैसला देते हुए सबूतों के अभाव में सभी 5 आरोपियों को बरी कर दिया था। सभी पांच आरोपी देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नबा कुमार सरकार, भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भारत भाई और राजेंद्र चौधरी को कोर्ट ने बरी करने का फैसला सुनाया। इन सभी को मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था और उनपर ट्रायल चला था। इस फैसले को लेकर पूरे देश में भगवा आंतकवाद पर बहस छिड़ गई है। 

यह मामला था

स्वामी असीमानंद इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक थे। 18 मई 2007 को हुए इस ब्लास्ट में 9 मारे गए थे जबकि 58 घायल हुए थे। बाद में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग में भी कुछ लोग मारे गए थे। आपको बता दें कि एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र सह विशेष अदालत ने केस की सुनवाई पूरी कर ली थी। इस मामले में 10 आरोपियों में से आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।


इसमें नबाकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल था। जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर हैं और तीन लोग जेल में बंद हैं। 2007 में हुए इस ब्लास्ट की शुरुआती छानबीन पुलिस ने की थी।यह केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में 2011 में यह मामला एनआईए को सौंपा गया। इस मामले में कुल 160 चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जिनमें से 54 गवाह मुकर चुके हैं। मस्जिद ब्लास्ट मामले में दो और मुख्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंगरा अभी भी फरार चल रहे हैं। इस पूरी सुनवाई के दौरान 226 गवाहों से पूछताछ हुई और 411 कागजात पेश किए गए।






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