कौन हैं 'अर्बन नक्सल' जो पीएम की हत्या की साजिश को लेकर चर्चा में हैं?
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नक्सलवाद की शुरुआत कहां से हुई : भारत में नक्सली हिंसा की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई, जिससे इस आंदोलन को इसका नाम मिला. नक्सलबाड़ी एक आदर्शवादी आंदोलन के रूप में शुरू हुआ, जहां दबे कुचले किसानों ने पहली बार हथियारों के साथ के साथ शोषण करने वाले जमिदारों से भूमि और फसल के अपने अधिकार के लिए लड़ाई की. जल्द ही यह लड़ाई क्रांति में बदल गई. माओ त्से तुंग के विचारों से प्रेरित छात्रों ने माओ के विचारों को अपनाया और खुद को आश्वस्त किया गया कि सरकार को उखाड़ फेंक सकते हैं.

आंदोलन भारत के 14 राज्यों में फैला. हालांकि इस विद्रोह को तो पुलिस ने कुचल दिया लेकिन उसके बाद के दशकों में मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में नक्सली गुटों का प्रभाव बढ़ा है. इनमें झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं.

अर्बन नक्सल शब्द आया कहां से आया : अर्बन नक्सल शब्द फिल्‍मकार विवेक अग्निहोत्री, जिन्हें भाजपा का करीबी माना जाता है उनके दिमाग की उपज है. विवेक अग्निहोत्री ने इसपर एक किताब भी लिखी है- 'अर्बन नक्‍सल्‍स' जिसका लोकार्पण इसी महीने हुआ. विवेक वही फिल्‍मकार है जिन्होंने ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ फिल्म अर्बन नक्‍सल्‍स के मुद्दे पर बनाई थी. अब विवेक देश भर में घूमेंगे और 'अर्बन नक्‍सल' का प्रचार करेंगे. 

अर्बन नक्सल उन लोगों को कहा जा रहा है जो सरकार विरोधी हैं लेकिन वे पुराने नक्सलियों के तरह काम नहीं करते. ये पढ़े लिखे, शहरों में नौकरियां करने वाले वे लोग हैं हो जो सरकार के खिलाफ नारे लगाना या बातें करना या नक्सलियों की मदद करने जैसे काम करते हैं. अर्बन नक्सल शब्द को पिछले कुछ महीने में काफी इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन अभी तक गिरफ्तारियों के बावजूद किसी के अर्बन नक्सल होने के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं.

अर्बन नक्सल क्यों चर्चा में हैं? : पुणे पुलिस को एक आरोपी के घर से ऐसा पत्र मिला था, जिसमें ‘राजीव गांधी की हत्या’ जैसी साजिश का खुलासा हुआ. पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की बात कही गई थी.

महाराष्ट्र में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड के प्रमुख राकेश मारिया ने 2016 में कहा था कि नक्सलियों ने शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से मजदूरों और छात्रों के बीच अपनी विचारधारा फैलाने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज समिति (गोल्डन क्वाड्रीलेटरल कमेटी) का गठन किया है. मरिया ने कहा था कि समिति का मुख्यालय पुणे में है और इसके निशाने पर सूरत, अहमदाबाद, मुंबई और ठाणे शहर थे.

पुलिस ने बुधवार को राणा जैकब विल्सन, सुधीर ढावले, सुरेंद्र गाडलिंग सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. विल्सन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. वहीं, ढावले को मुंबई से, गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को नागपुर से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस का कहना है कि यह पत्र विल्सन के दिल्ली के मुनिरका स्थित फ्लैट से बरामद किया था.

18 अप्रैल को राणा जैकब द्वारा कॉमरेड प्रकाश को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि हिंदू फासीवाद को हराना अब काफी जरूरी हो गया है. मोदी की अगुवाई में हिंदू फासिस्ट काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में उन्हें रोकना जरूरी हो गया है.

5 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुणे पुलिस का कहना था कि उसे ऐसे सबूत मिले हैं, जिसमें नक्सलियों द्वारा ‘राजीव गांधी हत्याकांड’ की तर्ज पर एक और कांड किए जाने की साजिश रचे जाने का पता चला था.



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