क्या घूरना, छूना और सीटी मारना भी यौन शोषण हैं?
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यौन शोषण क्या होता है? क्या किसी महिला को छूना, घूरना या गंदे मैसेज भेजना भी यौन शोषण का हिस्सा हो सकते हैं? ऑफिस में इस तरह के व्यवहार को गलत माना जाता है? इन सभी सवालों के जवाब हैं 'हां और हां'. बीते कुछ दिनों से हमारे देश में अधिकतर लोगों के दिमाग में ये बातें और सवाल घूम रहे हैं. अधिकतर पुरुष इस बात से चिंतित हैं कि ऑफिस में उनके किस तरह के व्यवहार को गलत और यौन उत्पीड़न की नजर से देखा जाएगा. इसीलिए हम आपके लिए लाए हैं ऐसी गाइड, जिसे पढ़कर आपको आपके सभी सवालों के जवाब तो मिल ही जाएंगे, आप एक बेहतर सामाजिक मनुष्य बनकर उभरेंगे.

हमारे संविधान में कामकाजी महिलाओं के साथ ऑफिस में होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में कोई नियम-कायदे नही बनाए गए हैं. इसीलिए इसके लिए एक अन्य नियमावली की जरूरत पड़ी. इस नियमावली का नाम है 'विशाखा गाइडलाइन्स'. इसके बारे में और इसके अनुसार जुर्म साबित होने पर क्या सजा होगी, इसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे. पहले आप अपने व्यवहार के बारे में सीख और समझ लीजिए. स्कूल, कॉलेज, ऑफिस, इन सभी जगहों पर, जहां महिलाएं और पुरुष साथ काम करते हैं, यह समझने की जरूरत है कि किस तरह से मर्यादाएं बनाई जाएं और कैसे उनका पालन किया जाए. सबसे पहले समझिए कि कौन सा व्यवहार बिलकुल गलत है.

ना का मतलब ना ही होता है:

मान लीजिए आपकी कोई सहकर्मी हैं और आपने फाइल लेने या देने के दौरान उनका हाथ दो तीन बार छू दिया. इससे अगर वो असहज हुईं और उन्होंने आपको ऐसा ना करने के लिए कहा. इसके बाद भी आप उन्हें परेशान करने के लिए ऐसा करते रहे तो यकीनन आपका व्यवहार यौन शोषण में शामिल होगा.

बहुत बार पुरुष ऑफिस में महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार कर देते हैं जो महिलाओं को बहुत असहज कर देता है और कई बार तो नौकरी बदलने या छोड़ने पर मजबूर कर देता है. कई बार यह हरकतें जानबूझ कर की जाती हैं और कई बार गैर-इरादतन भी होती हैं. इसीलिए पुरुषों को अपने व्यवहार के बारे में सीखने और समझने की जरूरत है. आपकी ये हरकतें शारीरिक, जुबानी या इशारों के रूप में होती हैं. आइये आपको विस्तार से बताएं कि कौन सी हैं ये हरकतें:

शारीरिक शोषण:

जैसा कि सभी समझदार लोगों को नाम से ही समझ आएगा, यहां छूना, हाथ पकड़ना, गले लगाना, चुटकी काटना, जबरदस्ती चूमने की कोशिशें करना, बार-बार टकराते हुए जाना या किसी महिला का रास्ता रोकना इसमें शामिल होते हैं. यहां यह साफ कर दिया जाना चाहिए कि ये सभी मापदंड उस महिला से आपके रिश्तों पर निर्भर करते हैं. अगर महिला आपकी दोस्त है जिसे उसकी सहमती से आप गले लगा सकते हैं तो वो यौन शोषण नहीं होगा. लेकिन इसके लिए उस महिला की सहमती होना जरूरी है और इस सहमती के लिए आपने कहीं से भी उसे डराया या धमकाया ना हो. डरा-धमकाकर झूठी स्वीकृति लेना भी यौन शोषण का हिस्सा होगा.

जुबानी शोषण:

कई पुरुषों की यह दलीलें हैं कि उन्होंने तो कभी महिला को हाथ नहीं लगाया, इसलिए उनका अभद्र रवैया यौन शोषण में नहीं शामिल होगा. लेकिन यह गलत है. अगर आप किसी महिला की शारीरिक बनावट पर कमेंट करते हैं, उसके साथ सेक्शुअल बातें करने की कोशिश करते हैं, डबल मीनिंग जोक्स सुनाते हैं जिन्हें लेकर वो सहज नहीं है, महिला की उपस्थिति में सेक्सुअल बातें करते हैं जो उसे परेशान करता है, उसे धमकाते हैं, स्त्रीसूचक गालियों का प्रयोग करते हैं तो ये सब यौन शोषण में शामिल होगा. यहां भी वहीं बात लागू होती है, जोक सुनाने और सेक्शुअल बातें करने के मामले में महिला से आपकी दोस्ती कैसे है.

गैर-जुबानी शोषण:

अब वो हरकतें जहां ना छूना लागू होना हैं ना ही कुछ बोलना. ये होते हैं गंदे इशारे, सेक्शुअल पोजीशन बनाते हुए इशारे करना, अपने कंप्यूटर या फ़ोन पर सेक्शुअल कंटेंट दिखाना, गंदे मैसेज भेजना, उनके बार-बार मना करने पर भी व्हाट्सऐप या मैसेज में उनसे उनकी तस्वीरें मांगना, सीटी बजाता और घूरना भी आपको यौन उत्पीड़न के आरोपियों की लिस्ट में शामिल कर सकता है. हो सकता है आपका इरादा उन्हें परेशान करना ना हो लेकिन ऐसी हरकतों से महिलाएं असहज हो जाएंगी और उनके लिए वहां काम करना मुश्किल हो जाएगा.

किसने बनाए ये नियम:

वैसे तो ये सभी नियम एक सभ्य इंसान के तौर पर खुद ही हर पुरुष को अपने लिए बनाने चाहिए. लेकिन जब ऑफिस में महिलाओं का काम करना मुश्किल होने लगा तो साल 1993 में मानवाधिकार कानून के अंतर्गत ये विशाखा गाइडलाइन्स बनाई गईं. इसके तहत दफ्तर में किसी भी महिला के सुरक्षित रहने की जिम्मेदारी वहां के प्रबंधन की होती है. किसी भी तरह के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए सबसे पहले उस महिला और संस्था के एम्प्लायर को दोषी माना जाता है. अब तो आप समझ ही गए होने कि ऑफिस या दफ्तर में आपको कैसा व्यवहार नहीं करना है.

और हां, एक बात का खास ध्यान रखिए, वो महिला भी ऑफिस में उसी वजह से है जिस वजह से आप हैं, काम करने के लिए. उसके काम को और मुश्किल ना बनाएं.


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