जब मंच पर ही भिड़ गए नरेंद्र मोदी और मनोहर लाल खट्टर के मंत्री, ये है इनसाइड स्टोरी
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दशहरा के मौके पर हरियाणा की सियासत में वो हुआ जिसकी बीजेपी ने शायद ही कभी उम्मीद की होगी. फरीदाबाद में रावण दहन के वक्त हजारों लोगों के सामने ही केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य कृष्णपाल गुर्जर और हरियाणा के उद्योग एवं पर्यावरण मंत्री विपुल गोयल आपस में भिड़ गए. दोनों में तीखी नोंक-झोंक हुई.

दोनों मंत्री रावण-दहन के अवसर पर अतिथि के रूप में मौजूद थे. यहां दशहरा मनाने को लेकर दो पक्षों में चल रही तनातनी के सहारे इन दो मंत्रियों के बीच चल रहा 'शीतयुद्ध' सियासी अखाड़े में बदलकर सबके सामने आ गया. दोनों मंत्रियों के बीच हुई झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

दरअसल, एक तरफ से गुर्जर और दूसरे की तरफ से गोयल मौजूद थे. दोनों एक ही मंच पर बैठे हुए थे. दरअसल दोनों मंत्रियों में विवाद तब शुरु हुआ जब विपुल गोयल ने कहा "तीन साल से रावण जलाने के नाम पर जो राजनीति हो रही है वो जनता देख रही है. जब रावण का अहंकार नहीं रहा तो फरीदाबाद के भाईचारे को बिगाड़ने वाले समझ लें कि जनता के हाथ में तीर-धनुष है..."

साथ ही मीरापुर, यूपी से बीजेपी के विधायक अवतार भड़ाना ने कहा, "बीजेपी में ऐसे लोगों का कोई स्थान नहीं है जो जनता को लूटता हो, सताता हो, ऐसे लोगों का पतन होगा. आने वाले समय में ऐसे राजनीतिक रावणों का दहन होगा." आमतौर पर सौम्य रहने वाले गुर्जर का पारा इतना सुनने के बाद चढ़ गया. जब उन्होंने विपुल को कुछ कहा तो विपुल ने भी गुर्जर पर हमला बोल दिया. दोनों बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. कुछ साल पहले तक दोनों में अच्छे संबंध थे.

इस पर गुर्जर ने विपुल गोयल का नाम लिए बिना ही कहा कि बहुत से लोगों को मैं राजनीति में लेकर आया. कभी किसी की जमीन पर कब्जा नहीं किया, किसी के पैसे नहीं मारे. इससे पहले विधायक सीमा त्रिखा ने भी शब्दबाण चलाए. उन्होंने कहा, राजनीति में उसका अंत निश्चित है जो अपनी मर्यादा भूल जाता है.

विपुल गोयल ने कृष्णपाल गुर्जर पर दशहरा पर्व में विवाद पैदा करने का आरोप लगा दिया. हालांकि गुर्जर ने कहा कि इस मामले में उनका कोई लेना देना नहीं है, मगर विपुल उनके तर्क से सहमत नहीं थे और लगातार कृष्णपाल गुर्जर पर हमला करते रहे.

बता दें कि पिछले साल दो पक्षों की इसी तनातनी में एक पक्ष के रावण का पुतला नहीं जल पाया था. इसी मैदान पर करीब 80 फुट के रावण का पुतला खड़ा ही नहीं होने दिया गया था. दशहरे पर रावण और कुंभकर्ण के ये पुतले सिद्धपीठ हनुमान मंदिर एनएच-एक, फरीदाबाद की कमेटी ने बनवाए थे.

जब पुतले खड़े नहीं हुए तो पदाधिकारियों ने इसे जलाया भी नहीं. दोनों का सिर लेकर दो नेताओं के नाम से शहर में शवयात्रा निकाली थी. दो दिन तक हरियाणा पुलिस ने पुतलों की सुरक्षा की. फिर नगर निगम की जेसीबी और कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों ने इसे तोड़कर बादशाह खान अस्‍पताल के पास फेंक दिया था.

इस साल भी दशहरा पर्व पर शोभा यात्रा व पुतला दहन करने को लेकर हनुमान मंदिर व फरीदाबाद धार्मिक व सामाजिक संगठन के बीच खींचतान चल रही थी. इसलिए पर्व के आयोजन का जिम्मा प्रशासन ने संभाला. इस खींचतान की भी जड़ें भी बीजेपी की अंदरूनी राजनीति से जुड़ी हुई हैं.

सिद्धपीठ हनुमान मंदिर एनएच-एक के प्रधान राजेश भाटिया के भाई चंदर भाटिया भाजपा के पूर्व विधायक हैं. उनके पिता कुंदनलाल भाटिया हरियाणा बीजेपी के सबसे पुराने नेताओं में शुमार होते थे. चंदर भाटिया और कृष्णपाल गुर्जर के बीच हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान से ही टिकट को लेकर छत्तीस का आंकड़ा है.

उसकी वजह ये है कि फरीदाबाद के सांसद और केंद्रीय मंत्री गुर्जर ने चंदर भाटिया की जगह सीमा त्रिखा को टिकट दिलाई और सीमा जीत भी गईं. तभी से दोनों पक्षों में ठनी हुई है. यह झगड़ा दशहरा पर सड़क पर आ जाता है. भाटिया परिवार ने गुर्जर को सियासी तौर पर सबक सिखाने के लिए हरियाणा के उद्योग मंत्री विपुल गोयल और राजनीति में गुर्जर के विरोधी माने जाने वाले अवतार सिंह भड़ाना को साधा हुआ है.

इसीलिए इस बार भी भाटिया परिवार ने आरोप लगाया कि बड़खल की विधायक सीमा त्रिखा व केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के हस्तक्षेप की वजह से उन्हें प्रशासन ने अनुमति नहीं दी. जबकि दूसरी ओर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल व यूपी के मीरापुर से बीजेपी के विधायक अवतार सिंह भड़ाना सिद्धपीठ हनुमान मंदिर के पक्ष में प्रशासन पर दवाब बनाए हुए थे. भड़ाना फरीदाबाद के सांसद रह चुके हैं.

पहले फरीदाबाद में बीजेपी ने सिर्फ कृष्णपाल गुर्जर को मंत्री बनाया था. तब यहां एक पावर सेंटर था, लेकिन बाद में गोयल मनोहरलाल कैबिनेट में शामिल हो गए तो यहां दो पावर सेंटर हो गए. 'गुरु-चेले' के रूप में मशहूर इस जोड़ी में उसके बाद धीरे-धीरे दरार आने लगी. जनता को अपना काम करवाने का एक और ठिकाना मिल गया.

उधर, मनोहरलाल कैबिनेट के मंत्री गोयल फरीदाबाद के पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना से मिलने-जुलने लगे, जो इस वक्त बीजेपी में हैं. यूपी के मीरापुर विधानसभा से विधायक हैं. गुर्जर को यह बात पसंद नहीं. क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेसी सांसद रहे भड़ाना को ही हराकर गुर्जर लोकसभा में पहुंचे और मोदी सरकार में उन्हें मंत्री पद मिला. भड़ाना फरीदाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं.

इसलिए वह इस समय बीजेपी के अंदर ही गुर्जर के बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. बहरहाल देखना यह है कि दो मंत्रियों की इस जंग पर बीजेपी आलाकमान क्या फैसला लेता है. क्योंकि लोकसभा के साथ ही हरियाणा विधानसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में इस तरह अंदरूनी खींचतान का सड़क पर आना, पार्टी की सेहत के लिए अच्छा साबित नहीं होगा.


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