Analysis: 2019 की रेस में पीछे छूटा विकास, राम मंदिर बना सबसे बड़ा मुद्दा
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दशहरा से अब तक महज 20 दिनों में राम मंदिर के मुद्दे ने राजनीतिक जोर पकड़ लिया है. आरएसएस और बीजेपी के कई नेता लगातार अयोध्या में मंदिर बनाने की मांग कर रहे हैं. एक तरफ जहां राजनीतिक मुद्दों की दिशा बदल रही है वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में हिंदुत्व के एजेंडे को देखते हुए 'ब्रांड योगी' तेजी से उभर रहा है.

यह सारी कवायद तब शुरू हुई जह दशहरा के दौरान आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनना चाहिए. पर यहां सवाल यह उठता है कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी का एजेंडा विकास न होकर राम मंदिर होगा.

ऐसा लगता है कि बीजेपी फिर से विकास के मुद्दे को छोड़कर राम मंदिर की ओर शिफ्ट हो रही है और इस मामले में किसी और नेता के बजाय योगी आदित्यनाथ इस सारी राजनीतिक विमर्श का चेहरा बनते जा रहे हैं.

विकास का चेहरा कहे जाने वाले पीएम मोदी राम मंदिर के मुद्दे पर कभी कुछ नहीं बोलते. यह सारा ज़िम्मा योगी के पास है क्योंकि वह काफी सशक्त तरीके से इसकी हिमायत करते हुए नज़र आते हैं.

पर सवाल यह है कि क्या यह बीजेपी-आरएसएस की सोची समझी रणनीति है या यह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वाभाविक राजनीति है क्योंकि 1990 में पहली बार गोरखपुर से सांसद बनने के साथ ही आदित्यनाथ हिंदुत्व को लेकर काफी प्रखर रहे हैं.

दूसरी बात जहां पीएम मोदी अभी तक एक बार भी अयोध्या नहीं गए हैं वहीं योगी आदित्यनाथ सीएम बनने के बाद से दो बार मंदिर जा चुके हैं और पूजा भी की.

तीसरी बात वो राम मंदिर के मुद्दे पर हमेशा बोलते रहे हैं. उन्होंने कहा, 'भगवान राम खुद ही राम मंदिर निर्माण का फैसला लेंगे. दूसरे मौकों पर भी उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर था, है और रहेगा.'

उनसे यूपी में या उसके बाहर जब भी सवाल किया गया तो उन्होंने सवालों से कभी भागने या बचने की कोशिश नहीं की बल्कि उन्होंने कहा कि राम मंदिर उनके दिल के काफी नज़दीक है और वह चाहते हैं कि यह जल्द से जल्द बन सके.

दीपावली के मौके पर योगी फिर से अयोध्या जाने वाले हैं ऐसी स्थिति में फिर से कयास लगाए जाने लगे हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा.

सूत्रों के अनुसार अगर सब कुछ सही रहा तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर की नींव रखेंगे. हालांकि राम मंदिर निर्माण के मामले में राज्य सरकार के हाथ में कुछ भी नहीं है. इस मामले में अध्यादेश लाने या कानून बनाने से लेकर जो कुछ भी होगा वो केंद्र सरकार के स्तर से होगा.

2019 के लोकसभा चुनाव में संघ परिवार और बीजेपी पूरी तरह से योगी का उपयोग करना चाहेगी. इसकी एक बानगी हम देख भी चुके है जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के नॉमिनेशन के दौरान योगी आदित्यनाथ उनके साथ दिखे.

अगर इसको और बड़े राजनीतिक स्पेक्ट्रम में देखा जाए तो कहा जा सकता है कि कांग्रेस व दूसरी राजनीतिक पार्टियों द्वारा लगातार बीजेपी पर विकास को लेकर लगाए जा रहे आरोपों से ध्यान हटाने के लिए भी राम मंदिर के मुद्दे को बीजेपी तूल पकड़ा रही है.

जहां राफेल डील, सीबीआई और सरकार व आरबीआई के बीच के विवाद सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं वहां क्या राम मंदिर और हिंदुत्व का मुद्दा गेम चेंजर साबित होगा. और अगर राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी के लिए मुख्य मुद्दा होगा तो ब्रांड योगी इसमें काफी कारगर साबित हो सकते हैं.


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