ANALYSIS: कांग्रेस-JDS ने कैसे फतह किया बीजेपी का किला
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कर्नाटक के बेल्लारी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस-जेडीएस उम्मीदवार बीएस उग्रप्पा ने जैसे ही 2 लाख से अधिक वोटों की बढ़त हासिल की कांग्रेस-जेडीएस में जश्न शुरू हो गया. पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने ट्वीट किया, 'जनार्दन रेड्डी के अमानवीय बातों को यह बेल्लारी की जनता का करारा जवाब है.' बता दें कि रेड्डी ने सिद्धारमैया के बेटे के निधन को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था. सिद्धारमैया ने खनन माफिया रेड्डी बंधु और बी श्रीरामुलु की तरफ इशारा करते हुए लिखा, "नरक चतुर्दशी के मौके पर बेल्लारी की जनता अंधकार से उजाले की तरफ बढ़ी है."

बेल्लारी को बीजेपी और खनन कारोबारी रेड्डी बंधुओं का गढ़ माना जाता है. जब बीजेपी को अहसास हुआ कि 14 साल बाद उनके किले में सेंध लगने वाली है तो पार्टी का एक भी नेता या रेड्डी परिवार का एक भी सदस्य घर से बाहर नहीं निकला. पांच में से चार सीटों पर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की जीत की बाद प्रदेश बीजेपी कार्यालय के बाहर भी माहौल गमगीन ही दिखा.

बेल्लारी में कांग्रेस को जो बढ़त मिली है वह बीजेपी के लिए किसी सदमे से कम नहीं है. खासकर तब जब लोकसभा चुनाव में महज कुछ ही महीने बाकी हैं

जब चुनाव आयोग ने शिमोगा, बेल्लारी और मांड्या सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया तब कांग्रेस के पास बेल्लारी के लिए कोई मजबूत उम्मीदवार ही नहीं था. काफी सोच विचार के बाद कांग्रेस ने वीएस उग्रप्पा पर दांव लगाया.

सिद्धारमैया, दिनेश गुंडुराव और डीके शिवकुमार की तिकड़ी ने बीजेपी को हराने के लिए रणनीति तैयार की. कांग्रेस-जेडीएस ने क्षेत्र में वोटरों तक पहुंचने के लिए करीब 80 बड़े छोटे नेताओं को तैनात किया. उन्होंने बेल्लारी में कांग्रेस विधायकों को भी अपने पक्ष में लिया.

इस सीट पर बीजेपी ने बी श्रीरामुलु की बहन जे शांता को टिकट दिया था. यहां बीजेपी की तरफ से प्रचार का जिम्मा श्रीरामुलु और रेड्डी बंधुओं के हाथ में था. यहां प्रचार के लिए बीएस येदियुरप्पा भी पहुंचे थे, हालांकि यहां बीजेपी की पूरी निर्भरता रेड्डी बंधुओं पर ही रही.

नतीजों के बाद श्रीरामुलु ने कहा, 'हार हमेशा अनाथ होती है लेकिन मैं इसकी जिम्मेदारी लूंगा.' उन्होंने बीजेपी की हार के लिए कांग्रेस के प्रचार प्रभारी डीके शिवकुमार को जिम्मेदार ठहराया. स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बेल्लारी में बड़ी जीत कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत का नतीजा है और पार्टी को इसका पूरा क्रेडिट मिलना चाहिए. प्रचार प्रभारी डीके शिवकुमार ने भी कहा कि यह कांग्रेस और जेडीएस कार्यकर्ताओं की जीत है. उन्होंने कहा, “लोग कह रहे हैं कि मैं चुनाव प्रभारी था तो यह जीत मेरी है. लेकिन इसका श्रेय जेडीएस और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिेए.”

वहीं कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव ने इस जीत को ऐतिहासिक करार दिया. वहीं जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवेगौड़ा और मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि यह जीत राज्य में बीजेपी शासन के अंत की शुरुआत है.

इस साल मई में हुए विधानसभा चुनाव से पहले तक रेड्डी बंधुओं को बीजेपी ने पूरी तरह इग्नोर कर रखा था. हालांकि चुनाव में बंधुओं ने कमबैक किया और कुछ सीटें जीतीं भी. येदियुरप्पा के 56 घंटे की सरकार में रेड्डी बंधुओं का नाम हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) में भी सामने आया था.

इस हार के बाद रेड्डी बंधुओं और श्रीरामुलु के लिए बेल्लारी की राजनीति में वापसी का रास्ता थोड़ा मुश्किल होगा.


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