सबरीमाला विवाद: एक्ट्रेस बोलीं, 'लोग समझते हैं कि महिलाओं की पवित्रता 'वजाइना' में होती है...
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मलयालम फिल्मों की अभिनेत्री पार्वती थिरूवोथु ने सबरीमाला मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है. पार्वती का कहना है कि शुरुआत से ही महिलाओं को अपवित्र माना जाता रहा है लेकिन वह इसके खिलाफ हैं. सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर अनुराधा सेनगुप्ता से बातचीत के दौरान पार्वती थिरूवोथु ने अपनी बेबाक राय रखी. पेश है इस बातचीत के कुछ खास अंश...

सवाल: पारंपरिक रूप से केरल के समाज में मां घर की मुखिया होती है. यहां साक्षरता दर भी काफी ज़्यादा है. इसके अलावा यहां बहुत सी महिलाएं काम करके अपना परिवार चलाती हैं. क्या यहां की इमेज कुछ और है जबकि सच्चाई कुछ और कहती है?

जवाब: मुझे लगता है कि कागज़ पर आंकड़े कुछ और है जबकि लोगों की मानसिकता यहां बिल्कुल अलग है. लिंग के हिसाब से आपकी वरीयता तय की जाती है. मेरे साथ भी ऐसा था - मैं कौन से कपड़े पहनती हूं, मैं अपने माता-पिता से कैसे बात करती हूं, मैं अपने भाई से कैसे बात करती हूं, मैं एक आदमी से कैसे बात करता हूं. ये तमाम चीज़ें समाज में हमेशा देखी जाती रही है. जब मैं 17 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में आई तभी से मुझे लगने लगा कि कागज पर कुछ और है और दिखाने के लिए कुछ और. जब वे मुझसे बात करते हैं, तो ऐसा लगता है कि एक महिला से बात कर रहे हैं, न कि एक व्यक्ति से.

सवाल: केरल में बहुत सी महिलाएं सबरीमाला के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं. वे फैसले के खिलाफ क्यों हैं?

जवाब: मैंने वास्तव में सबरीमाला के मुद्दे पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन मैंने पूरे जीवन इस मुद्दे पर सोचा है. मैं मासिक धर्म और अपवित्रता के हमेशा खिलाफ रही हूं. मैंने मंदिरों में जाना बंद कर दिया. मुझे पता है कि लोग मेरी आलोचना करेंगे. लेकिन मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हूं. आपको बता दें कि जब आप वास्तव में धर्म की बात करते हैं तो आप उन महिलाओं को नहीं समझा सकते हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं. जहां तक फिल्म उद्योग का सवाल है यहां महिलाओं से लड़ना पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा मुश्किल काम है.

लोग समझते हैं कि मासिक धर्म (मेंसुरेशन सायकल) के दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं. महिलाओं की पवित्रता को लोग वजाइना और वर्जिनिटी से जोड़ कर देखते हैं. इसे दूर करने की जरूरत है और इसके लिए मुझे नहीं पता कि कितने साल या पीढ़ी लग जाएंगे.


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