आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सजा दिलाना जरूरी: नरेन्द्र मोदी
मुझे खुशी है कि सऊदी अरब और भारत इस बारे में साझा विचार रखते हैं.


नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुलवामा आतंकी हमले को दुनिया पर छाए मानवता विरोधी खतरे की एक और क्रूर निशानी बताते हुए बुधवार को कहा कि भारत और सऊदी अरब आतंकवाद को किसी भी प्रकार का समर्थन दे रहे देशों पर सभी संभव दबाव बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमत हैं. 

सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के साथ शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आतंकवाद का आधारभूत ढांचा नष्ट करना, इसे मिल रहा समर्थन समाप्त करना और आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों को सजा दिलाना बहुत जरूरी है'.

प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में पिछले हफ्ते पुलवामा में हुए बर्बर आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना इस मानवता विरोधी खतरे की वजह से दुनिया पर छाए कहर की एक और क्रूर निशानी है. 'इस खतरे से प्रभावशाली ढंग से निपटने के लिए हम इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद को किसी भी प्रकार का समर्थन दे रहे देशों पर सभी संभव दबाव बढ़ाने की आवश्यकता है'. 

मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और इसके लिए एक मजबूत कार्ययोजना की भी जरूरत है, ताकि हिंसा और आतंक की ताकतें हमारे युवाओं को गुमराह न कर सकें. उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है कि सऊदी अरब और भारत इस बारे में साझा विचार रखते हैं'. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में दोनों देशों के साझा हित हैं और सऊदी अरब के युवराज से बातचीत में इस क्षेत्र में कार्यों में तालमेल बनाने और भागीदारी को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति हुई है. उन्होंने कहा, 'हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि आतंकवाद से मुकाबला करने के संदर्भ में समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और मजबूत द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए लाभप्रद रहेगा'. 

मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी विषयों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की है. उन्होंने कहा, 'हमने अपने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का निश्चय किया है. हमारे अर्थतंत्र में सऊदी अरब से संस्थागत निवेश को सुविधाजनक बनाने के लिए, हम एक ढांचा स्थापित करने पर सहमत हुए हैं। मैं भारत के आधारभूत ढांचा क्षेत्र में सऊदी अरब के निवेश का स्वागत करता हूं'.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे ऊर्जा संबंधों को सामरिक गठजोड़ में तब्दील करने का समय आ गया है. दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और सामरिक पेट्रोलियम रिज़र्व में सऊदी अरब की भागीदारी दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों को खरीददार,बिक्रेता से बहुत आगे ले जाती है. मोदी ने कहा, 'हम अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में अपने सहयोग को मज़बूत करने पर सहमत हुए हैं'. 

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में सऊदी अरब का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सामरिक वातावरण के संदर्भ में दोनों देशों ने आपसी रक्षा सहयोग को मज़बूत करने और उसका विस्तार करने पर भी सफल चर्चा की है. उन्होंने कहा कि व्यापार और पर्यटन को बढ़ाने हेतु सऊदी अरब के नागरिकों के लिए ई-वीज़ा का विस्तार किया जा रहा है.

उन्होंने भारतीयों के लिए हज़ कोटे में वृद्धि के लिए आभार प्रकट किया और कहा कि 27 लाख भारतीय नागरिकों की सऊदी अरब में शान्तिपूर्ण और उपयोगी उपस्थिति दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है. मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में सऊदी अरब, भारत के सबसे मूल्यवान सामरिक सहयोगियों में से है. 

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब हमारे विस्तृत पड़ोस में है, एक करीबी दोस्त है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत भी है. प्रधानमंत्री ने 2016 में सऊदी अरब की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि हमने अपने संबंधों को विशेष रूप से, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में कई नए आयाम दिए थे.


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