इस कलयुग की रावण हैं ममता बैनर्जी- ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि
भीम आर्मी संस्थापक चन्द्रशेखर रावण को भी लिया आड़े हाथों


उज्जैन : महामना आचार्य कुशाग्रनंदी जी महाराज के आत्मीय शिष्य ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि जी महाराज ने सोमवार को होटल समय, वासवानी प्लाजा, फ्रीगंज, उज्जैन में आयोजित हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ’उज्जैन बने आदर्श पवित्र नगरी’ की मांग के प्रति आंदोलनकारी रुख अपनाने की बात कही। इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल में राम नवमी का जुलूस रोके जाने से गुस्साए ऊर्जा गुरु ने मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी को खूब खरी खोटी सुनाई। सोमवार को महाकाल की नगरी पहुंचे अरिहंत ऋषि ने कहा कि, “रामनवमी के जुलूस को रोकने वाले और राम के नाम पर राजनीति करने वाले लोग भारत में पैदा होकर भी रावण की सिफारिश करते हैं और जिन ममता बैनर्जी ने श्रीराम के जुलूस को रोकने का प्रयास किया है वह इस कलयुग की रावण अवतार हैं।“

उन्होंने आगे कहा कि, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को ये भी याद रखना चाहिए कि जिस प्रकार श्रीराम के साथ, हनुमान जी की वानर सेना ने लंका पर विजय प्राप्त की थी, उसी तरह हम भी उनकी लंका ढहा देंगें।“ इतना ही नहीं, ऊर्जा गुरु ने भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को भी आड़े हाथों लिया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, ’आज देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो राम के नाम पर बात करें, रामराज्य स्थापित करने का स्वप्न देखे और उसे साकार करने के लिए कदम बढ़ाए। लेकिन कुछ लोगों का पैशन है अपने नाम के आगे रावण लगाना। इससे वह खुद को महात्मा समझने लगते हैं। उन्हें ये याद रखना चाहिए कि रावण का कोई वजूद नहीं है और श्रीराम एक ऐसे संस्कृति महापुरुष हैं जिनके नाम पर पूरा विश्व जाना जाता है।’ 

इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश में आईटी डिपार्टमेंट की छापेमारी का जिक्र करते हुए ऐसे नेताओं पर सख्त कार्रवाई करने की बात भी कही जिनके ठिकानों से बेनामी संपत्ति जब्त की गई है। ऊर्जा गुरु के अनुसार, ’हमें बाहरी देशों में जमा काले धन से ज्यादा चिंता देश की मासूम जनता के साथ गद्दारी करने वाले नेताओं के पास जमा पैसों की होनी चाहिए। ऊर्जा गुरु का मानना है कि नेताओं के पास दबा काला धन यदि बाहर आ जाता है तो किसी भी सरकार को देश से 15 लाख देने का झूठा वादा नहीं करना पड़ेगा।

पिछले लंबे समय से उज्जैन को पवित्र नगरी बनाए जाने की मांग कर रहे ऊर्जा गुरु ने मध्यप्रदेश शासन से इस विषय पर अति शीघ्र विचार करने का आग्रह किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक पत्र लेख भी भेजा गया है। ऊर्जा गुरु के अनुसार, यदि सूबे का प्रशासन इस ओर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं करता है तो इसे देशव्यापी रूप से एक व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

उज्जैन को पवित्र नगरी घोषित किए जाने की मांग कर रहे ऊर्जा गुरु का मानना है कि, भारत में सात ऐसे शहर है जहाँ की भूमि को पवित्र उत्तम फल देने वाला माना गया है। इन शहरों में एक नाम उज्जैन शहर का भी आता है। भगवान् महावीर की तपस्थली रही उज्जैन नगरी को विश्वभर में महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है। इस लिहाज से दुनियाभर से पर्यटक उज्जैन भगवन महाकाल के दर्शन करने पहुंचते है। उन्होंने कहा कि, यदि उज्जैन में मंदिर परिसर के समीप मीट मांस और मदिरा जैसी दुकानें होती हैं तो यह कहीं न कहीं आस्था और स्थान की पवित्रता के साथ खिलवाड़ है। यहां शुद्धता का विशेष खयाल रखा जाना चाहिए। साफ सफाई के साथ-साथ सात्विक भोजन और सात्विक आचरण को बढ़ावा देने की तरफ ध्यान देना चाहिए।


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