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बिना चिकित्सक के ही हुआ अस्पताल का संचालन
मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच एमबीबीएस, चार आरबीएसके तथा चार आयुर्वेद चिकित्सक की पदस्थापना है।


छपरा(हि.स.) । सारण जिले के मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शनिवार को शाम पांच बजे से रात को 8:30 बजे लगभग चार घंटे तक बिना डाक्टरों के ही संचालित करने का मामला सामने आया है । बताया जाता है कि गैर चिकित्साकर्मी तथा बाहरी लोगों ने मरीजों तथा घायलों का चार घंटे तक इलाज किया । यही नहीं, प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल छपरा भी रेफर करते रहे। मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का यह मामला प्रशासनिक व राजनीतिक हल्कों में चर्चा का विषय बन गया है । शनिवार की शाम पांच बजे से रात्रि 8:30 बजे तक मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी डॉक्टर था। इस दौरान गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु तथा मारपीट में घायल तेरह लोगों का इलाज गैर चिकित्सक तथा बाहरी लोगों ने किया । इस दौरान ना ही कोई कम्पाउंडर था और ना ही ड्रेसर ।

 13 डाक्टर हैं पदस्थापित
मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच एमबीबीएस, चार आरबीएसके तथा चार आयुर्वेद चिकित्सक की पदस्थापना है। एक एमबीबीएस डाक्टर सालों से डेपुटेशन में हैं  जबकि चार एमबीबीएस डाक्टर फिलहाल पदस्थापित हैं। शनिवार की शाम 5 बजे से रात को 8:30 बजे तक ना तो एमबीबीएस डाक्टर थे और ना ही आरबीएसके तथा आयुर्वेद के डॉक्टर  मौजूद  थे ।  

पूर्व जिला पार्षद व जदयू नेता ने रात में की शिकायत 
मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों के नहीं रहने के कारण पूर्व जिला पार्षद पंकज सिंह तथा जदयू नेता निरंजन सिंह ने सारण के जिलाधिकारी तथा सिविल सर्जन से शिकायत की। अस्पताल में भर्ती तथा इलाज के लिए आये मरीजों ने जब पूर्व जिला पार्षद को मोबाइल पर डाक्टर तथा कर्मचारियों के गायब रहने की शिकायत की तो वह उसी समय अस्पताल पहुंचे और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी । उनकी शिकायत पर अधिकारियों ने लापरवाह चिकित्सकों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया तथा तुरन्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर को भेजने की बात कही। रात में अधिकारियों ने फोन पर बात कर लगभग 8:30 बजे आयुष चिकित्सक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। 

 रात में ही बीडीओ तथा सिविल सर्जन ने की अस्पताल की जांच 
जिलाधिकारी के निर्देश पर मांझी के बीडीओ मिथिलेश बिहारी वर्मा ने सात  बजे अस्तपाल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक भी डाक्टर उपस्थित नहीं मिला। डाक्टरों के अस्पताल में उपस्थित नहीं रहने की रिपोर्ट रात में ही जिलाधिकारी को सौंप दी । रात में दस बजे सिविल सर्जन माधवेश्वर झा ने पूरी टीम के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण में उपस्थित आयुष चिकित्सक को कड़ी फटकार लगाई। अस्पताल परिसर में लगभग दो घंटे तक एक -एक चीज की जांच की । एक आयुष डाक्टर को छोड़कर एक भी डॉक्टर मुख्यालय में मौजूद नहीं थे। डाक्टरों के नहीं रहने के कारण उपस्थिति पंजी नहीं मिल सकी। दवा वितरण केंद्र का भी मुआयना किया । वितरण केंद्र में एक भी दवा भंडार पंजी, दवाओं की सूची नहीं मिली। हद तो तब हो गई, जब उन्होंने आक्सीजन सिलिंडर की जांच की और सिलिंडर में आक्सीजन ही नहीं मिली। अस्पताल परिसर में कुव्यवस्था देख सीएस ने उपस्थित कर्मचारियों तथा डाक्टर को कड़ी फटकार भी लगाई। पंजी मागने पर चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों ने डाक्टर के लाकर में रखने की बात कही दी। अस्पताल में एक भी पंजी सीएस को नहीं मिल सकी। 

 चिकित्सकों - कर्मियों की कार्यशैली थर्ड आई में कैद
सरकार डाक्टरों तथा भगौड़े कर्मियों की कार्यशैली पर निगाह रखने के लिए अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगवाई गई है । पूरे अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगा है, फिर भी डॉक्टर तथा कर्मचारी हमेशा भागे ही रहते हैं। सीसीटीवी की निगरानी में डॉक्टर नहीं, बल्कि गैर चिकित्साकर्मी तथा बाहरी लोगों के द्वारा मरीजों का इलाज करने तथा बेहतर इलाज के लिए छपरा भी रेफर करने की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद है । 

 क्या कहते हैं सीएस 
 अस्पताल परिसर में डाक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायत मिली थी। शिकायत पर अस्पताल परिसर की जांच की गई। सभी भगोड़े डाक्टरों तथा कर्मचारियों के एक दिन का वेतन काटा जायेगा और स्पष्टीकरण पूछा जाएगा । अस्पताल में पाई गई अनियमियता की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जायेगी। 
डा माधवेश्वर झा 
सिविल सर्जन, सारण 


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