... कुछ ऐसा अयोध्या का राम मंदिर, जहां विराजेंगे रामलला
कांसेप्ट फोटो


सुप्रीम कोर्ट ने आज सालों बाद पुराने अयोध्या विवाद पर शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसी के साथ शीर्ष अदालत ने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार को तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक अयोध्या में मंदिर का निर्माण बिल्कुल गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर होगा।

 

एक नजर अयोध्या के फैसले पर 

रामलला विराजमान को मालिकाना हक का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि शिया और सुन्नी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा है कि सर्वसम्मति से से सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला लिया है।
1949 में दो मूर्ती रखी गई- सीजेआई
बाबर के दौर में बनाई गई मस्जिद
मीर बाकी ने बाबर के वक्त बनवाई मस्जिद
निर्मोही अखाड़े का दावा भी खारिज किया गया- सीजेआई
खुदाई में मिले सबूतों को अनदेखा नहीं कर सकते
बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नही बनी थी, ASI ने रिपोर्ट में मंदिर होने की बात कही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा सबूतों को अनदेखा नहीं कर सकते 
खुदाई में जो मिला वो इस्लामिक ढांचा नहीं

मंदिर तुड़वाकर मस्जिद बनाने का पुख्ता सबूत नहीं - सुप्रीम कोर्ट
 ASI ने मंदिर के बारे में साफ नहीं कहा
 हिन्दू की आस्था गलत होने का कोई प्रमाण नहीं, जमीनी विवाद का फैसला कानून आधार पर 
सीताद्वार, सिंहद्वार, और वेदी का हुआ जिक्र
12वीं से 16वीं सदी तक क्या था इसके पुख्ता सबूत नही
 आस्था और विश्वास पर मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है- सुप्रीम कोर्ट
मुस्लिम के पास जमीन का विशेष कब्जा नहीं था- सुप्रीम कोर्ट
मुस्लिम इस जमीन अपना एकाधिकार साबित नही कर पाये

अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन देने का फैसला
 राम लला का दावा बरकरार, अयोध्या में तीन महीने में योजना लाए सरकार- सुप्रीम कोर्ट
मंदिर निर्माण को लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश, ट्रस्ट को दिया निर्माण की योजना बनाने का अधिकार
सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन दी जाएगी
विवादित जमीन पर रामलला विराजमान, अयोध्या में राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ

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