24 घंटे जनता के लिए खड़ी एंबुलेंस टीम को नहीं मिल रहा उनका वेतन
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सिर्फ एक फोन कॉल पर जनता की मदद के लिए तुरंत PPE किट पहन कर उनकी सेवा में हाज़िर हो जाने वाले, फ्रंटलाइन वर्कर्स गणेश और प्रशांत केरला में इस वक्त कोरोना वायरस किस लड़ाई में अपना योगदान दे रहे हैं।

24 घंटे काम करने वाले यह लोग कोविड-19 एंबुलेंस टीम का हिस्सा है, एस इमरजेंसी टीम के साथ एक टेक्नीशियन गणेश का कहना है की  "हम एक क्वारंटाइन सेंटर में जा रहे हैं. किसी को सैंपल कलेक्शन के लिए अस्पताल ले जाने की आवश्यकता है. मैं तीन दिनों से इस ड्यूटी पर हूं. मैं अपने परिवार में लौटने से पहले कुछ दिनों के लिए लगातार काम करता हूं. मुझे गर्व है कि मैं इस टीम का एक हिस्सा हूं."


लेकिन 24 घंटे काम करने वाली इस एंबुलेंस टीम को उनका वेतन नहीं मिल पा रहा है वह बताते हैं कि हम चौबीसों घंटे काम करने के लिए तैयार हैं. लेकिन, हम अपनी सैलरी चाहते हैं समय पर. ये बड़ी मात्रा में नहीं हैं, 10,000-25,000 रु है. हम अभी तक हमारा अप्रैल का वेतन नहीं मिला है. हमारा जनवरी के बाद से कुछ आंशिक बकाया भी है. इस तरह से जारी रखना हमारे लिए कठिन है'

एंबुलेंस टीम के साथी प्रशांत कहते हैं कि हम अपने वेतन के लिए कोई प्रदर्शन नहीं करना चाहते हैं देश के संकट में ड्यूटी करना हमारे लिए गर्व की बात है।


लेकिन यह हमारे और हमारे परिवार के लिए बहुत मुश्किल भरा है.' यहां राज्य में लगभग 108 ऐसी एंबुलेंस हैं जो कि जीवीके ईएमआरआई (मेडिकल इमरजेंसी सर्विस प्रदाता) द्वारा संचालित होती है. 

कोरोना से युद्ध में एबुलेंस टीम अहम भूमिका निभा रही हैं, स्वास्थ्य अधिकारियों औऱ जिला स्तरीय कोविड वार रूम्स के निर्देशों पर लोगों को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और क्वारंटाइन सेंटर्स से अस्पताल ले जाती है.

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