शराब के ठेके बंद करने से 2100 करोड़ का नुकसान
ग़रीब महिलाओं के वोट को ना खोने के उद्देश्य से करीब-करीब सभी दलों ने कहा की पूर्ण रूप से नशेबंदी लागू होनी चाहिए।


चेन्नई : गुरुवार को विधानसभआ में बजट पेश करते हुए वक्त वित्त मंत्री डी. जयकुमार ने कहा था की राज्य में सरकार द्वारा चलाई जा रही शराब की दुकानों को बंद करने से सालाना 2100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। इसमें करीब 500 करोड़ रुपये उत्पाद शुल्क भी शामिल है। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले राज्य में नाशबंदी को लेकर बड़ा मुद्दा उठ खड़ा हुआ। सभी दलों को अपना-अपना स्टैंड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना पड़ा। ग़रीब महिलाओं के वोट को ना खोने के उद्देश्य से करीब-करीब सभी दलों ने कहा की पूर्ण रूप से नशेबंदी लागू होनी चाहिए। 

ऐसे में ध्यान देने लायक बात यह है कि तमिलनाडु इस मुद्दे से पहले भी उलझ चुका है। एम.जी.आर ने कोशिश की थी लेकिन गिरते राजस्व के चलते और नकली शराब पीने से मरने वालों की घटना को देखते हुए बाद में इस निर्णय को वापस ले लिया गया था। 2001 से 2006 तक सत्ता में रही जयललिता ने अपने अनेक समाज कल्याण कार्यक्रमों को अंजाम देने हेतु शराब बेचने का प्रक्रिया को ही सरकारी बना दिया। 

बीच में 2006 से 2011 में करुणानिधि सरकार को भी इसे चलाते रहने में ही होशियारी दिखी। इतने में 2016 चुनाव से पहले विधानसभा में जयललिता ने घोषणा की कि सौ फीसदी नशेबंदी को लागू करने के लिए समय चाहिए और अगर फिर चुनकर आई तो कुछ चरणों में इस काम को किया जाएगा। इसके अनुसार, 2016 में जब चुनाव जीत कर पद सम्भाला तो पहले ही दिन 500 शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश पर हस्ताक्षर किया। 

अब एदपाडी पलनिसामी ने 500 और दुकानों को बंद करने का आदेश अपने पहला दिन दिया। इस तरह कुल 1000 दुकानों का आय बंद हो चुका है। इसी का आंकड़ा 2100 करोड़ जयकुमार ने अपने बजट भाषण में उल्लेख किया। नशेबंदी के पक्ष में बोलने वालो का यह कहना है की सरकार ने कोई बड़ा काम नही किया। वैसे भी उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक 31 मार्च से पहले जितने हाईवे में शराब की दुकानें हैं, उनको वहां से हटाना होगा। जानकारों का कहना है इनकी संख्या करीब दो हजार है। 


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